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Jodhpur News: गहलोत का सरकार पर हमला, बोले- जनता को चाहिए परिणाम, चिरंजीवी योजना और यमुना जल पर सरकार को घेरा

Wed, 24 Jun 2026 03:45 PM IST
जोधपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर दौरे के दौरान भाजपा सरकार और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना, यमुना जल परियोजना, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त और विभिन्न संस्थानों में हो रही नियुक्तियों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना देश की सबसे बेहतर स्वास्थ्य योजनाओं में से एक थी, जिसकी पूरे देश में सराहना हुई थी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत 25 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज, एमआरआई, सीटी स्कैन, दवाइयां और अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में योजना की स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर दवाइयों की कमी, ऑपरेशन में देरी और मरीजों से अतिरिक्त राशि मांगने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।

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यमुना जल परियोजना पर गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली जाकर बैठकें कर रहे हैं, यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने दोहराया कि जिस दिन यमुना का पानी राजस्थान के नीमकाथाना क्षेत्र तक पहुंच जाएगा, वे स्वयं मुख्यमंत्री निवास जाकर मुख्यमंत्री को माला पहनाकर बधाई देंगे। उन्होंने कहा कि जनता को बैठकों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखने से मतलब है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि उन्होंने किसी जनप्रतिनिधि का अपमान नहीं किया था, बल्कि उन नेताओं की आलोचना की थी जो धन के लालच में दल बदलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई विधायक और सांसद करोड़ों रुपये में बिक रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए कहा कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

गहलोत ने आरपीएससी, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और अन्य संस्थानों में हाल की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता के लिए खतरा है। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास इन नियुक्तियों को रोकने के सीमित अधिकार हैं, क्योंकि यह सरकार और राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र का विषय है।

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