जिले के बोरुंदा कस्बे में लखारा समाज की 17 वर्षीय युवती की मौत के बाद परिजनों के बीच हुए विवाद के कारण श्मशान घाट पर करीब सात घंटे तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका। मौत को संदिग्ध बताते हुए एक पक्ष ने अंतिम संस्कार पर आपत्ति जताई, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया रुकवा दी और शव को बोरुंदा राजकीय अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया।
थानाधिकारी सुजनाराम विश्नोई ने बताया कि 3 फरवरी को महिला पुलिस थाना बालोतरा से सूचना मिली थी कि प्रियंका पुत्री अशोक कुमार लखारा, निवासी बालोतरा की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और परिजनों का एक पक्ष अंतिम संस्कार का विरोध कर रहा है। सूचना मिलते ही बोरुंदा पुलिस मौके पर पहुंची। उस समय युवती का अंतिम संस्कार उसके ननिहाल पक्ष की ओर से किया जा रहा था। मौके पर वर्तमान पिता प्रवीण लखारा, माता बसंती देवी, दादा चंपालाल, चाचा नरपत सहित करीब 200 ग्रामीण मौजूद थे।
ये भी पढ़ें: Bundi News: पंचायती राज चुनावों को लेकर जिले की निर्वाचक नामावली जारी, 7 लाख से अधिक मतदाता करेंगे मतदान
इसी दौरान बाड़मेर निवासी मुकेश लखारा, मीरा देवी, पूर्व पिता अशोक लखारा, कमल किशोर व कनका देवी सहित अन्य परिजन वहां पहुंचे और युवती की मौत को संदिग्ध बताते हुए अंतिम संस्कार रोकने की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने समझाइश कर अंतिम संस्कार रुकवाया और शव को मोर्चरी भिजवाया।
परिजनों के अनुसार युवती कुछ समय से बीमार थी और उसका इलाज जोधपुर में चल रहा था। 2 फरवरी की शाम करीब 8:30 बजे जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। बोरुंदा पक्ष का कहना है कि चिकित्सकों ने किडनी फेल होना मौत का कारण बताया है, जबकि मृतका के पिता अशोक कुमार की रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज की गई है।
मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के आदेश पर मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। मंगलवार को समयाभाव के कारण पोस्टमार्टम नहीं हो सका। अब बुधवार को मेडिकल बोर्ड की देखरेख में पोस्टमार्टम किया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों की सहमति के बाद ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा।