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Jodhpur: 96% प्रश्नों के उत्तर मिले, बजट सत्र में बढ़ेगी सदन की कार्यक्षमता, जोधपुर में बोले विधानसभा अध्यक्ष

Sat, 24 Jan 2026 09:49 PM IST
जोधपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि ब्यूरोक्रेसी के साथ बैठक लेने के बाद अब विधानसभा में पूछे गए 96 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो चुके हैं। सत्र शुरू होने तक यह संख्या और बढ़ने की संभावना है, जिससे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य सवालों के जवाब समय पर मिलने लगे हैं। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी दो दिवसीय दौरे पर जोधपुर पहुंचे। सर्किट हाउस पहुंचने पर पुलिस जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने आगामी बजट सत्र को लेकर जानकारी दी।

बजट सत्र का कार्यक्रम
देवनानी ने बताया कि 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। 28 जनवरी को राज्यपाल का अभिभाषण होगा, जिसके बाद शोक अभिव्यक्ति की जाएगी। राज्यपाल के अभिभाषण के अगले दिन से उस पर चार दिन तक बहस होगी। इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक होगी। फिलहाल जानकारी के अनुसार 11 फरवरी को राज्य का बजट प्रस्तुत किया जाएगा और बजट सत्र के 27 फरवरी तक चलने की संभावना है। आगे की कार्यवाही बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के निर्णय के अनुसार तय की जाएगी।

डिस्टर्ब एरिया बिल पर प्रतिक्रिया
डिस्टर्ब एरिया बिल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए देवनानी ने कहा कि यह सरकार और विपक्ष का विषय है। जब यह मामला सदन में आएगा, तो उस पर पूरी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि कई बार यह सामने आया है कि डिस्टर्ब एरिया में लोग मजबूरी में अपनी संपत्ति बेचकर चले जाते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए पहले भी गुजरात सहित एक-दो राज्यों में ऐसे प्रावधान किए गए हैं। सदन में आने पर सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

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'सदन को अधिक समय तक चलाने का प्रयास'
सदन में अधिक से अधिक समय तक चर्चा को लेकर पूछे गए सवाल पर देवनानी ने कहा कि हाल ही में लखनऊ में देशभर के विधानसभा अध्यक्षों की बैठक हुई थी, जिसमें इस विषय पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि विधायकों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए सदन का नियमित और शांतिपूर्ण संचालन जरूरी है। सदन चलाना पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सदन अधिक से अधिक चले, सार्थक बहस हो और सरकार सभी मुद्दों पर संज्ञान लेकर जवाब दे। पहले प्रश्नों के उत्तर सीमित संख्या में आते थे, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। इससे विधायकों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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