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Barmer News: रविंद्र भाटी ने सदन में सरकार को घेरा, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर तीखे सवाल

Fri, 30 Jan 2026 10:37 AM IST
बाड़मेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने सदन में शिव सहित पश्चिमी राजस्थान से जुड़े कई ज्वलंत जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पर्यावरण संरक्षण, ओरण-खेजड़ी, गोचर भूमि, गौवंश तथा शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

विधायक भाटी ने बाड़मेर जिले में NFSA के अंतर्गत पात्र एवं अपात्र परिवारों की सूची से संबंधित गंभीर अनियमितताओं को सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो सभी मापदंड पूरे करने के बावजूद अब तक खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित हैं, जबकि कई अपात्र परिवार सूची में शामिल हैं। इस संबंध में सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर उन्होंने स्पष्ट जवाब मांगा।

इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जा रहे खाद्यान्न की गुणवत्ता, निर्धारित मात्रा में कटौती तथा जमीनी स्तर पर हो रही अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। शिव विधानसभा क्षेत्र के अनेक जरूरतमंद परिवार आज भी खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने मांग की कि सभी वास्तविक पात्र परिवारों का शीघ्र सर्वे कर उन्हें NFSA से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें उनका संवैधानिक और मूलभूत अधिकार मिल सके।

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शिव विधायक के प्रश्नों का उत्तर देते हुए खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि सरकार ने किसी को भी जबरन खाद्य सुरक्षा से बाहर नहीं किया है, बल्कि राजस्थान में 54 लाख से अधिक लोगों ने स्वयं गिव-अप के माध्यम से अपने नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटवाए हैं। बाड़मेर जिले के संबंध में उन्होंने बताया कि यहां 1 लाख 56 हजार लोगों ने स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा छोड़ी है।

मंत्री ने यह भी बताया कि नए पोर्टल, जिसे 26 जनवरी को एक वर्ष पूर्ण हुआ है, के माध्यम से 3 लाख 8 हजार से अधिक लोगों को खाद्य सुरक्षा में जोड़ा गया है। शिव विधानसभा क्षेत्र में 43 हजार से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से खाद्य सुरक्षा छोड़ी है, जबकि 82 हजार से अधिक नए लाभार्थी जोड़े गए हैं। मंत्री ने बताया कि शिव क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 1421 आवेदन लंबित हैं। बाड़मेर जिले से 1525 ऐसे आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें केवाईसी नहीं करवाई गई थी, जिनमें से 800 को पुनः जोड़ा गया है, जबकि 642 आवेदन लंबित हैं।

विधानसभा में अपनी बात रखते हुए विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने पश्चिमी राजस्थान की आत्मा माने जाने वाले ओरण और खेजड़ी के संरक्षण का मुद्दा भी प्रभावशाली ढंग से उठाया। उन्होंने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल के जीवन, संस्कृति और पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है। मां अमृता देवी और 363 बलिदानियों का बलिदान हमें यह सिखाता है कि प्रकृति की रक्षा वास्तव में हमारे अस्तित्व की रक्षा है।

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उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विकास के नाम पर हो रही अंधाधुंध कटाई ने खेजड़ी, ओरण, गोचर भूमि, गौवंश और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है। बिजली और अन्य परियोजनाओं के नाम पर जिन क्षेत्रों ने इसकी कीमत चुकाई, वहां के स्थानीय लोगों को न तो पर्याप्त अधिकार मिले, न रोजगार और न ही पर्यावरण संरक्षण की गारंटी। संसाधन समाप्त हो गए, जीवन-व्यवस्था प्रभावित हुई लेकिन उसका लाभ बाहरी क्षेत्रों को चला गया। विधायक भाटी ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर विनाश का यह मॉडल अब किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने सदन में यह भी कहा कि पश्चिमी राजस्थान ओरण बचाने, खेजड़ी बचाने, गोचर और गौवंश की रक्षा के लिए एकजुट है। इस दिशा में उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि खेजड़ी संरक्षण हेतु तत्काल सख्त और प्रभावी कानून बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।

इसी क्रम में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम में किए गए हालिया परिवर्तनों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन परिवर्तनों को लेकर जनता और छात्र वर्ग में रोष है, जिसे गंभीरता से लेते हुए सरकार को विशेष और ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बना रहे और युवाओं के हित सुरक्षित रह सकें।

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