अलवर जिले के नोगांवा थाना क्षेत्र के गांव तेलियाबास में पुलिस की दबिश के दौरान एक माह की बच्ची की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बच्ची को पैरों तले कुचल दिया, धमकाकर खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए और पोस्टमार्टम भी नहीं कराया। घटना के बाद सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हो गए और पूर्व मंत्री व भाजपा नेता नसरू खान के नेतृत्व में बच्ची के शव को लेकर अलवर पहुंचे, जहां जमकर प्रदर्शन किया गया।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
इधर, मामले के तूल पकड़ने के बाद एएसपी डॉ. तेजपाल ने दबिश देने गई पुलिस टीम में शामिल हेड कांस्टेबल जगवीर और गिरधारी, कांस्टेबल शाहिद, ऋषिकेश और सुनील को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं, नोगांवा थाना प्रभारी अजीत सिंह बड़सरा के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए।
परिजनों का आरोप
मृतका के पिता इमरान ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई है, जिसमें हेड कांस्टेबल गिरधारी और जगबीर पर बच्ची की हत्या का आरोप लगाया गया है। उन्होंने बताया कि दबिश के दौरान पुलिसकर्मी घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे और चारपाई पर सो रहे इमरान को खींचने लगे। इस दौरान बेड पर सो रही बच्ची उनके जूतों से कुचल गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने घर की तलाशी भी ली, लेकिन कुछ बरामद नहीं हुआ।
पुलिस का पक्ष
वहीं, पुलिस का कहना है कि साइबर सेल से मिली लोकेशन के आधार पर दबिश दी गई थी। दबिश के दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई थी, बल्कि परिवार ने घटना के दो घंटे बाद बच्ची की मौत की सूचना दी। पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के मामले में मोबाइल लोकेशन के आधार पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन बच्ची के पिता इमरान पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं था। साथ ही, दबिश के दौरान वह मोबाइल भी बरामद नहीं हुआ, जिसकी लोकेशन बताई गई थी। मामले की जांच जारी है, जबकि परिजन दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।