अलवर शहर में शनिवार दोपहर को हल्की धूप निकलने के बाद शाम को एक बार फिर मौसम पलट गया। रात को शहर ने एक बार फिर कोहरे की चादर ओढ़ ली। स्थिति यह है कि हवा के साथ कोहरा उड़ रहा है और कोहरे के साथ ओस भी गिर रही है। घना कोहरा होने के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है और सामने कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा है।
हालात यह है कि पास की वस्तु या व्यक्ति भी दिखाई नहीं पड़ रहे। इससे पहले कल सुबह भी गहन कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता 30 मीटर के करीब थी। सुरक्षा की दृष्टि से वाहन चालक हेड लाइट जलाकर वाहन चलाते हुए दिखे। दिन में मौसम कुछ खुला और कोहरा भी लगभग नहीं के बराबर हो गया। लेकिन शाम को छह बजे ही घनी धुंध छा गई और थोड़ी देर बाद घना कोहरा हो गया। शहर में जगह-जगह लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। लोग घर से भी शॉल ओढ़कर निकल रहे हैं। हालात यह है कि रेल गाड़ियां भी सात से आठ घंटे देरी से आ जा रही हैं।
हाइवे पर धीमी पड़ी वाहनों की रफ्तार
राजस्थान के पूर्वी सिंह द्वार कहे जाने वाले अलवर में पारा जबरदस्त गिरने के साथ ही कोहरे की चादर में लिपट गया। जिले में रविवार सुबह विजिबिलिटी लगभग जीरो बनी है। शहर में भी शीतलहर और कोहरे के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इस वजह से हाइवे पर वाहनों की आवाजाही भी कम बनी हुई है। बीते एक जनवरी को शाम होते ही सन्नाटा छाया रहा। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों तक इसी तरह के हालात रहने की संभावना है। वहीं, हल्की बारिश की भी चेतावनी दी गई है। शीतलहर के प्रकोप से लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। स्टेट हाइवे-13 और नेशनल हाइवे-48 पर चल रहे वाहनों की रफ्तार भी धीमी हो गई है। हालात यह है कि वाहन रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं। कोहरे के चलते विजिबलिटी इतनी कम है कि सुबह के वक्त भी वाहन चालकों को हेड लाइट का सहारा लेना पड़ा है।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण अलवर के मौसम का मिजाज खराब चल रहा है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना कर पड़ रहा है। साथ ही उनकी दिनचर्या पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।हालांकि, रबी की कुछ फसलों को इससे नुकसान भी हो रहा है। क्योंकि सरसों और आलू व मटर फसल में मौसम का मिजाज विपरीत माना जा रहा है। गेहूं और चना फसल के लिए मौसम फायदेमंद है।