शहर के हृदय स्थल में स्थित त्रिपुलेश्वर महादेव मंदिर सैकड़ों वर्षों से आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर लगभग 300 से 400 साल पुराना है और अलवर के रियासतकाल में इसका निर्माण कराया गया था। त्रिपोलिया परिसर में स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी विशेषता के कारण भक्तों को आकर्षित करता है। यहां स्थित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है, जो इसे अन्य शिवालयों से अलग बनाता है।
श्रद्धालुओं के अनुसार त्रिपोलिया मंदिर के शिवलिंग की यह अनोखी खासियत है कि यह दिन में तीन बार रंग बदलता है। इसी वजह से यहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। भक्तगण सुबह से लेकर दोपहर 3 बजे तक जलाभिषेक करते हैं। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई कर महादेव का भव्य शृंगार किया जाता है। यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।
माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और अलवर के राजा-महाराजाओं के समय में इसका निर्माण हुआ था। मंदिर में नर्भदेश्वर शिवलिंग स्थापित है, जिनकी प्रतिदिन विभिन्न रूपों में झांकियां सजाई जाती हैं। मंदिर में सुबह 2 बजे मंदिर के द्वार खुलते हैं और 4 बजे, 6 बजे, संध्या आरती और रात में शयन आरती होती है। आरती के समय सैकड़ों भक्तगण भगवान शिव की आराधना करते हैं।
त्रिपुलेश्वर महादेव मंदिर के प्रति लोगों की इतनी गहरी आस्था है कि आसपास के दुकानदार आरती के बाद ही अपनी दुकानों को खोलते हैं। वे मंदिर के गोमुख से जल लाकर अपनी दुकानों के सामने छिड़काव करते हैं, ताकि भगवान शिव का आशीर्वाद उन पर बना रहे। मंदिर में शिव और शक्ति के रूप में अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर इस ज्योत में घी अर्पित करते हैं। यह परंपरा मंदिर की स्थापना के समय से ही चली आ रही है।
मंदिर की महिमा और शिवलिंग के रंग बदलने की अद्भुत विशेषता के चलते श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। नगर निगम सुपरवाइजर शिवराज अग्रवाल ने बताया कि इस मंदिर की मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भव्य आयोजन होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।