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फगवाड़ा में मकर संक्रांति को लेकर सज गए बाजार

मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। मकर संक्रांति का त्योहार लोग अभी भी पुराने रीति-रिवाजों से ही मनाते हैं और लोगों में खास तौर पर युवाओं व बच्चों को इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। इसका कारण है इस दिन उड़ाए जाने वाले पतंग। लोग पतंगों से दिवानगी की हद तक प्यार करते हैं। जगह-जगह पतंगबाजी के मुकाबले भी आयोजित किए जाते हैं। फगवाड़ा के विभिन्न बाजारों का दौरा कर पतंग विक्रेताओं से बातचीत की तो नई मंडी स्थित सुमित भंडारी काइट हाउस के मालिक सुमित भंडारी ने बताया कि वह पिछले 14 सालों से फगवाड़ा में पतंग बेचने आते हैं। उनके पास हर तरह की पतंगे हैं, पांच फीट, छह फीट तक की बड़ी पतंगे भी  हैं जो 250 से 300 रुपये के करीब बिकती हैं। उन्होंने बताया कि पतंग उड़ाने की शौकीनों को आकर्षित करने के लिए इस बार विभिन्न रंगों के साथ-साथ कई तरह की पतंगे जैसे तूकल, लखनऊ काट, छज्जे, परी चंद्रमा, स्लेट, जहाज, पेंसिल छज्जे, बटर पेपर आदि पतंग की वैरियटयों को भी शामिल किया गया है। पतंग की शुरुआत मंजुला पतंग से होती है जिसकी कीमत 500 रुपये सैकड़ा इसके साथ-साथ 600 रुपये सैंकड़ा और 700 रुपये सैकड़ा के करीब भी पतंगे हैं। इसी तरह राम कुमार पतंग वाले ने बताया कि उनके पास बरेली से मंगवाया कई तरह का मांझा जैसे पांडे, जाकिर खान, ग्लाइडर, डिस्कवरी एनआरके आदि कई तरह का मांझा है, जोकि डेढ़ सौ रुपये से लेकर 1500 रुपये तक है। वहीं उन्होंने बताया कि तीन रुपए से लेकर उनके पास 300 रुपये तक की पतंगे हैं। डड्डल मुहल्ला के दीपक काइट हाउस वाले का कहना है कि उनके पास 2 रुपये से लेकर 200 रुपए तक की पतंग तथा 15 रुपए गुच्छी से लेकर 1000 रुपए तक की डोर के गट्टू हैं। उन्होंने कहा कि उनकी डोर व पतंग अमृतसर, जालंधर व बरेली से आती है। उन्होंने बताया कि इस बार पतंग ठंड होने के कारण कम ही बिक रहे हैं। दुकानदार अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्लास्टिक डोर बेचने से गुरेज कर रहे हैं। इस कारण केवल धागा डोर ही बिक रही है। पतंग पांच रुपये से लेकर 300 रुपये तक बिक रहे हैं। पतंग में लखनऊ घाट रामपुरी, सिद्धू मूसे वाला, पाकिस्तानी डिजाइन, भूत, कनाडा परी, तूकल चैस, यूएसए फलैग, हैप्पी लोहड़ी आदि पतंग की बहुत मांग ही रही है।

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