गदर पार्टी के नायक शहीद करतार सिंह सराभा के पैतृक गांव सराभा में उनके 110वें शहीदी दिवस को समर्पित भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रख्यात नाटककार गुरशरण सिंह (भाई मन्ना सिंह) भी हरेक वर्ष बरसी पर नाटक करने के लिए आते थे। कई वर्षों बाद लोक कला मंच रजि: मंडी मुल्लांपुर के सहयोग से सराभा के युवाओं की पहल पर इसे फिर शुरू किया गया है। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में 16 नवंबर 1915 को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी के फंदे को चूमने वाले सात योद्धाओं, शहीद करतार सिंह सराभा, विष्णु गणेश पिंगले, बख्शीश सिंह, हरनाम सिंह सियालकोट, जगत सिंह सुरसिंह, सुरैन सिंह वड्डा, सुरैन सिंह छोटा को याद किया गया और शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में सबसे पहले नाटक "धरत वंगारे तख्त" प्रस्तुत किया गया, उसके बाद हरकेश चौधरी द्वारा लिखित व निर्देशित और शहीद करतार सिंह सराभा की जीवन गाथा पर आधारित नाटक "चलिए देश नूं युद्ध करन " की प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम में रत्तन और जोधां गांव के बच्चों द्वारा कोरियोग्राफी भी प्रस्तुत की गई, जो दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। अंत में शहीद करतार सिंह सराभा के मातृ परिवार के सदस्यों, बाबा बंत सिंह महोली खुर्द, परमिंदर सिंह पिंदा कनाडा, तलविंदर सिंह बिंदर कनाडा, सुखविंदर कौर सराभा , मास्टर मेवा सिंह के अलावा लोक कला मंच मंडी मुल्लापुर की टीम और रत्तन एवं जोधां के बच्चों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस मौके पर अमरेंद्र सिंह अब्बी सराभा, अमृतपाल सिंह सराभा, संदीप सिंह सराभा, हरदेव सिंह यूके कमलजीत सिंह कमल सराभा, जसप्रीत सिंह घनगस, बलदेव सिंह देव सराभा, इकबाल सिंह, डॉ. कमलजीत कौर कमल रतन, सुखविंदर कौर आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।