1984 दंगा पीड़ित परिवारों ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बड़ा ऐलान किया है। जालंधर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीड़ित परिवारों ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर पुनर्वास संबंधी फैसलों को लागू नहीं किया गया तो 5 विधवाएं चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठेंगी। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि पंजाब में भगवंत मान सरकार को करीब साढ़े चार साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक 1984 दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों के तहत पुनर्वास संबंधी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे, लेकिन मौजूदा सरकार ने उन्हें लागू नहीं किया। दंगा पीड़ितों ने बताया कि 15 सितंबर 2025 को वित्त मंत्री के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए गए थे। इनमें दंगा पीड़ित परिवारों को घर आवंटित करना, प्रत्येक जिले में व्यापार के लिए बूथ देना, शिक्षित युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाना और लुधियाना में रद्द किए गए 150 रेड कार्ड बहाल करना शामिल था। पीड़ितों का आरोप है कि सरकार ने इन फैसलों की अधिसूचना जारी करने के बाद उन्हें रद्द कर दिया, जो दंगा पीड़ितों के साथ “बड़ा विश्वासघात” है। उन्होंने कहा कि पंजाब में रह रहे करीब 25 हजार दंगा पीड़ित परिवार इस फैसले से आहत हैं और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना पीड़ित परिवारों ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “कांग्रेस ने हमारी छाती में खंजर मारा है, कांग्रेस हमारी पुरानी दुश्मन है।” वहीं केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी i से अपील की गई कि 1984 दंगा पीड़ितों को इंसाफ दिलाया जाए।उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बनने के बाद एसआईटी बनाकर न्याय दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक केवल सज्जन कुमार के खिलाफ कार्रवाई हुई है, बाकी आरोपियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दंगा पीड़ित परिवारों ने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत समिति की बैठक बुलाकर पुनर्वास से जुड़े सभी फैसलों को लागू करे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो राज्यभर में आंदोलन तेज किया जाएगा और 5 विधवाएं आमरण अनशन पर बैठेंगी।