देश में विकास के दावों के बीच एक ऐसा गांव भी है जहां आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाएं लोगों से कोसों दूर हैं। करीब 200 लोगों की आबादी वाला यह गांव हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता या पुल नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजाना खतरनाक तरीके से नदी पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-किसानी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें नदी के उस पार जाना पड़ता है। फसल काटने से लेकर बाजार जाने तक हर काम के लिए नदी पार करना उनकी मजबूरी बन गई है। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जब नदी का जलस्तर बढ़ने से हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।