एक दिन पहले रविवार को फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में सामने आए हाईटेक नकल मामले के बीच बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रखा है। यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि अब तक की पुलिस जांच में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। मामला परीक्षा शुरू होने के बाद ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल करने की कोशिश का है, न कि पेपर लीक का। इस मामले में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 454 से अधिक फार्मेसी अफसर पदों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में 6474 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सबसे पहले फरीदकोट के एक परीक्षा केंद्र पर यूनिवर्सिटी की टीम ने एक अभ्यर्थी को ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़ा, जिसके बाद पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर 28 संदिग्ध अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया, जबकि नकल रैकेट संचालित करने के आरोप में सात अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।यूनिवर्सिटी का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार यह संगठित नकल का प्रयास था, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने जैसी स्थिति सामने नहीं आई। पूरे मामले की रिपोर्ट पंजाब सरकार को भेजी जा रही है और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।