हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए एंट्री टोल बैरियरों का विवाद अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। नंगल निवासी एडवोकेट उतांश मोंगा ने भारत के राष्ट्रपति के समक्ष 80 पन्नों की याचिका दायर करके इन टोल बैरियरों को असंवैधानिक और अवैध करार देते हुए केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 256 और 257 के तहत हस्तक्षेप करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार इन एंट्री बैरियरों के माध्यम से हर साल आम जनता से लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये की अवैध वसूली कर रही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला अब केंद्र और हिमाचल सरकार के बीच टकराव का रूप ले चुका है। एडवोकेट मोंगा ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) भी इन टोल बैरियरों पर आपत्ति जता चुका है। एनएचआई का मानना है कि इन बैरियरों के कारण राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और प्रबंधन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण द्वारा हिमाचल सरकार को इन बैरियरों को हटाने के लिए पत्र भी भेजा गया था, लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने बताया कि इस मामले से संबंधित एक जनहित याचिका हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में पहले से ही विचाराधीन है। इस संघर्ष में 'पंजाब मोर्चा जन कल्याण कमेटी', 'कीर्ति किसान मोर्चा' और अन्य किसान संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। एडवोकेट मोंगा ने कहा कि 13 अप्रैल को पंजाब सरकार के साथ हुई बैठक के दौरान एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क (प्रारूप ढांचा) भी सौंपा गया था, जिस पर पंजाब सरकार द्वारा सकारात्मक रुख अपनाने के संकेत मिले हैं।