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फिल्म 'सतलुज' से फिर चर्चा में SYL विवाद: जानिए पंजाब-हरियाणा जल विवाद का पूरा इतिहास

Tue, 07 Jul 2026 05:05 PM IST
Chandra Prakash Neeraj Video Desk Amar Ujala Dot Com

अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज इन दिनों चर्चा में है, लेकिन रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। हालांकि, फिल्म अन्य देशों के दर्शकों के लिए अब भी उपलब्ध है। फिल्म एक ऐसे दौर की कहानी दिखाती है, जब पंजाब में हजारों लोगों के कथित तौर पर लापता होने और फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने के आरोप लगे थे।  सतलुज फिल्म से चर्चा में आई सतलुज पंजाब-हरियाणा के लिए बेहद अहम रही है। इस नदी का विवादों से भी लंबा संबंध रहा है। ताजा विवाद का भी अपना एक इतिहास है। एक विवाद ऐसे भी है जिसने सत्ता तक बदली लेकिन वो आज तक नहीं सुलझा है। फिल्म 'सतलुज' 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई। हालांकि, रिलीज के महज दो दिन बाद, 5 जुलाई को फिल्म को भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। फिल्म को सीबीएफसी का सर्टिफिकेट नहीं लेने के कारण यह कदम उठाया गया। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म सतलुज के रिलीज होने के बाद इसके निर्देशक हनी त्रेहन ने कहा था कि इस फिल्म में कोई कांट-छांट नहीं की गई है और न ही इसके मूल स्वरूप से कोई समझौता किया गया है। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई। इसके तहत भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के उपयोग का पूरा अधिकार मिला। पंजाब के विभाजन के बाद हरियाणा राज्य बना। इसके बाद सवाल उठा कि रावी और ब्यास के पानी में हरियाणा का हिस्सा कैसे मिले। इसी उद्देश्य से सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाने की योजना बनाई गई, ताकि सतलुज का पानी हरियाणा तक पहुंच सके। हालांकि, पंजाब ने इसका विरोध किया। उसका कहना था कि 'रिपेरियन सिद्धांत' के अनुसार किसी नदी का पानी उसी राज्य का होता है, जहां से वह नदी बहती है।
 

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