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चार पीढ़ियों ने सेना में दी सेवा, कारगिल पोस्ट PT 13620 पर कैसे पाई विजय,सुनिए

Video Desk Amar Ujala Dot Com Updated Wed, 10 Dec 2025 02:00 PM IST

बर्फ से ढकी करगिल की पहाड़ियां… करीब 14 हजार फुट की ऊंचाई… लक्ष्य कठिन था, लेकिन जोश भरपूर था। यही कारण था कि तिरंगे की शान ने हमें पाकिस्तान की इस पोस्ट पर हमला करने और उसे कैप्चर करने की ताकत दी। यह घटना है 17 मई 1965 की, जब पाकिस्तान द्वारा कच्छ की जमीन हथियाने के बाद भारत ने करगिल सेक्टर में पाकिस्तान की पोस्ट पीटी 13620 पर एक आइसोलेटेड अटैक किया और तिरंगा लहरा दिया।उस समय मात्र 25 वर्ष की आयु में इस कारनामे को अंजाम देने वाली टीम में वालंटियर के रूप में शामिल हुए वीर चक्र अवार्डी कर्नल रणबीर सिंह। उनके अनुसार वह दृश्य आज भी उनकी आंखों के सामने ताजा है।कर्नल रणबीर सिंह ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी चार पीढ़ियां देश सेवा में आगे रही हैं। उनके दादा, पिता, दो भाई और एक भतीजे ने सेना के लिए अपना सर्वस्व समर्पित किया। मूल रूप से पटियाला निवासी कर्नल रणबीर सिंह बताते हैं कि उस दौर में पूरे परिवार पर सेना का गहरा जुनून था। उन्हें यह कहते हुए गर्व होता है कि उनके दादा जगीरदार और जैलदार थे, और इमरजेंसी के दौरान, परिवार के तीन भाइयों के फौज में होने के कारण, उनके पिता को वार जगीर (एलाउंस) भी मिलता था।परिवार की चौथी पीढ़ी में शामिल कैप्टन करमिंदर सिंह कंग, जो कैप्टन बी.एस. कंग के पुत्र थे, को कमीशन मिला और वह 16 राजपूताना राइफल्स में शामिल हुए। बाद में श्रीलंका में ऑपरेशन के दौरान, जब वे आईपीकेएफ (Indian Peace Keeping Force) का हिस्सा थे, एक्शन के दौरान वीरगति प्राप्त कर गए। यह घटना वर्ष 1989 में हुई।
 

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