शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), अकाल तख्त और शिरोमणि अकाली दल को मौजूदा संकट से उबारने के लिए सरबत खालसा बुलाने की मांग ने पंजाब की पंथक और सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी और अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने स्पष्ट कहा है कि पंथक संस्थाओं को एक परिवार के प्रभाव से मुक्त करवाने और सिख कौम को एकजुट करने के लिए सरबत खालसा समय की जरूरत है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाया जा सकता है। ज्ञानी रघबीर सिंह के इस बयान ने विशेष रूप से शिरोमणि अकाली दल (बादल) पर दबाव बढ़ा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरबत खालसा बुलाया जाता है तो इसका सबसे सीधा प्रभाव अकाली दल पर पड़ेगा, जो पहले ही अंदरूनी मतभेद और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों से जूझ रहा है।