राज्यसभा सांसदों के दल बदल के साथ ही भाजपा ने पंजाब में अपना कूटनीतिक चक्रव्यूह रच दिया है। यह कोई हैरत की बात नहीं हैं, क्योंकि साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने इसी रणनीति से काम करते हुए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और कांग्रेस के कई आला नेताओं को अपने पाले में किया था। उस वक्त कांग्रेस सत्ता में थी इसलिए भाजपा का निशाना कांग्रेस थी मगर अबकी बार व्यूह रचना सत्तारूढ़ आप के लिए है। इसी कूटनीतिक चक्रव्यूह से उभर कर सत्ता वापसी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसके लिए पार्टी को नए सिरे से चुनावी रणनीति तैयार कर मैदान में उतरेगी। इसकी बड़ी जिम्मेदारी पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया, सीएम भगवंत मान और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष अमर अरोड़ा के कंधों पर होगी। पंजाब में पार्टी का संगठन मजबूत है और साल 2022 में प्रचार का तरीका भी आक्रामक रहा था। सूबे में चुनाव लड़ने के लिए अच्छा फंड भी मिला था और विदेशों में बैठे एनआरआई पंजाबियों ने खुलकर समर्थन किया था। अब साल 2027 के लिए चुनौती इसलिए बड़ी दिख रही है क्योंकि साल 2022 के चुनावी रणनीतिकारों में से दो बड़े नेता एवं राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आप के सिपाही से भाजपाई बनने वाले सात राज्यसभा सांसदों में से छह पंजाब कोटे के हैं इसलिए इसका भी विपरित असर आप पर पड़ना लाजिमी है।