मिसल शहीदां तरना दल हरियां वेलां से जुड़े कथित जमीन विवाद पर जथेदार बाबा निहाल सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि लंगर की एक इंच जमीन भी न बेची जा सकती है और न ही किसी को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जत्थेबंदी और उसकी संपत्ति को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में बाबा निहाल सिंह ने बताया कि वर्ष 1967 में जब उन्होंने जिम्मेदारी संभाली थी, तब संगठन के पास केवल नौ एकड़ जमीन थी। संगत के सहयोग और गुरु साहिब की कृपा से आज 150 एकड़ से अधिक भूमि लंगर और जत्थेबंदी के नाम पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति पूरी तरह पंथ की अमानत है और इसका निजी उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्लॉट बिक्री से प्राप्त राशि उनके बैंक खाते में सुरक्षित है और उसे केवल गुरुद्वारा व धार्मिक सेवाओं पर ही खर्च किया जाएगा। यदि निजी उपयोग का एक भी प्रमाण सामने आता है तो वह पंथ की ओर से दी जाने वाली हर सजा स्वीकार करेंगे। इस मौके पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एकतरफा बातें प्रसारित की जा रही हैं और तथ्यों की अनदेखी की जा रही है। दोनों नेताओं ने संगत से अफवाहों पर ध्यान न देने और पंथक एकता बनाए रखने की अपील की।