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विधानसभा की कार्यवाही से अकाल तख्त का जिक्र हटाना निंदनीय: मजीठिया

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब विधानसभा की कार्यवाही से अकाल तख्त साहिब का उल्लेख हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी सरकार और विधानसभा अध्यक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने इसे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि अकाल तख्त साहिब की मर्यादा से जुड़े शब्दों को कार्यवाही से हटाने का किसी को अधिकार नहीं है। मजीठिया ने दावा किया कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले सभी विधायकों ने श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेककर श्री गुरु ग्रंथ साहिब से संबंधित नए कानून में आवश्यक संशोधन करने पर सहमति जताई थी। उनका आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष ने भी कानून में कुछ कमियों को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में इस विषय पर सदन में हुई चर्चा के अंश कार्यवाही से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि मजीठा से विधायक गनीव कौर मजीठिया ने सदन में अकाल तख्त साहिब के निर्देशों का हवाला देते हुए संशोधन की मांग उठाई थी, लेकिन उनके बयान के कुछ हिस्से कार्यवाही से हटा दिए गए। मजीठिया ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया। अकाली नेता ने आरोप लगाया कि सरकार सिख धार्मिक मामलों पर राजनीति कर रही है तथा बेअदबी, बरगाड़ी और बहबल कलां जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किए गए वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने मांग की कि कार्यवाही से हटाए गए शब्दों को तत्काल बहाल किया जाए और सिख भावनाओं का सम्मान किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार और विधानसभा अध्यक्ष अपने रुख में बदलाव नहीं करते तो उन्हें पंजाब की जनता और सिख समुदाय से माफी मांगनी पड़ेगी।

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