मजीठा थाने में दर्ज एफआईआर में अधिवक्ता बिक्रमजीत सिंह बाठ का नाम शामिल किए जाने के विरोध में अमृतसर बार एसोसिएशन ने गुरुवार को “नो वर्क” का आह्वान कर हड़ताल की। वकीलों ने इसे कानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह पनेसर ने कहा कि नगर परिषद चुनावों के बाद पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए एक युवक की कानूनी स्थिति की जानकारी लेने के लिए अधिवक्ता बिक्रमजीत सिंह बाठ मजीठा थाने गए थे। बाद में उन्हें पता चला कि बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर में उनका नाम भी शामिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी वकील का दायित्व अपने मुवक्किल की पैरवी करना होता है और इसे अपराध नहीं माना जा सकता। शिरोमणि अकाली दल के लीगल एडवाइजर एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली ने आरोप लगाया कि एफआईआर नंबर 98 में अधिवक्ता बाठ का नाम जानबूझकर शामिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध वीडियो में कहीं भी कोई गैरकानूनी गतिविधि दिखाई नहीं देती। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि मामला वापस नहीं लिया गया तो पंजाब भर में वकीलों द्वारा आंदोलन और धरने दिए जाएंगे। वकीलों ने इसे पूरे कानूनी समुदाय की प्रतिष्ठा और स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया।