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Mahakal Bhasm Aarti: त्रिपुंड-त्रिशूल, डमरू से सजे बाबा महाकाल, खुल गया तीसरा नेत्र; जयकारों से गूंज उठा मंदिर

Mon, 08 Jun 2026 07:18 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर सोमवार सुबह विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। देर रात से ही भक्त दर्शन के लिए कतारों में लग गए थे। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। अलौकिक श्रृंगार और दिव्य दर्शन से पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की अष्टमी के अवसर पर प्रातः 4 बजे भस्म आरती का आयोजन किया गया। वीरभद्र भगवान से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए और गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत एवं फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटा बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। पुजारियों एवं पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार कर कपूर आरती उतारी तथा उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया।

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इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई। आज के विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल को भांग से अलंकृत कर त्रिपुंड, त्रिनेत्र और चंद्रमा से सजाया गया। भगवान के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

यह है आरती का समय भस्म आरती सुबह 4 से 6 बजे तक दद्योदक आरती प्रात: 7 से 7:45 बजे तक भोग आरती प्रात: 10 से 10:45 बजे तक संध्या पूजन सायं 5 से 5:45 बजे तक संध्या आरती सायं 7:00 से 7:45 बजे शयन आरती रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक महाकालेश्वर मंदिर मे आरतियों के समय में हुआ यह बदलाव आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक जारी रहेगा।
  भस्म आरती सृंगार दर्शन  

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