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MP: पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ 15 को लाखों भक्त उड़ाएंगे रंग, जानिए सीहोर में कैसे खेली जाएगी ‘महादेव की होली’

Sat, 08 Mar 2025 02:39 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

मध्यप्रदेश के सीहोर में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में 15 मार्च को ‘भगवान महादेव की होली’ मनाई जाएगी। शहर एक बार फिर शिव भक्तों का साक्षी बनेगा। पंडित प्रदीप मिश्रा लाखों भक्तों के साथ महादेव की होली खेलेंगे। महादेव की होली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महादेव की होली में देशभर से भक्त शामिल होंगे। 
 
रंगों का त्योहार होली समस्त त्योहारों का शिरोमणि है। यह हर्षोल्लास, उमंग, उत्साह, एकता, प्रेम और मेल-मिलाप का अनुपम उपहार लेकर आता है। यह त्योहार भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भले ही इसका नाम और मनाने का तरीका भिन्न-भिन्न हो, लेकिन उन सभी में होली की छटा बिखरती है। 

सीहोर में महादेव की होली का यह चौथा वर्ष है। महादेव की होली को लेकर विठलेश सेवा समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस होली में शामिल होने के लिए अनेक भक्त साक्षी बनने के लिए तैयार हो चुके हैं।

कैसे मनाई जाती है महादेव की होली?
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि महादेव की होली उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है। होली के दूसरे दिन भाई दूज के अवसर पर 15 मार्च को सुबह नौ बजे से दो घंटे के लिए अंतरराष्ट्रीय कथावाचक के साथ लाखों भक्त महादेव की होली खेलेंगे। महादेव की होली का पर्व चमत्कारेश्वर मंदिर से शुरू होकर मनकामेश्वर मंदिर, तहसील चौराहा तक जाएगा। सीहोर के पांच शिव मंदिरों में यह होली खेली जाती है। महादेव की होली मनाने के लिए एक लौटे पानी में केसरिया रंग, अष्टगंध या चंदन-हल्दी घोलकर शिव को स्नान कराया जाता है। इसे ही महादेव की होली कहा जाता है।

2022 से शुरू हुई परंपरा
सीहोर में पिछले तीन साल से होली के दूसरे दिन भाई दूज पर महादेव की होली खेलने की परंपरा शुरू हुई है। इस साल महादेव की होली का चौथा वर्ष है। साल 2022 में पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर पहली बार महादेव की होली खेली गई थी। उन्होंने शहर के चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर से इसकी शुरुआत करते हुए तहसील चौराहे स्थित मनकामेश्वर मंदिर तक होली खेली थी।

महादेव की होली से पहले खेली जाती थी नवाबी होली
देश की आजादी से पहले भोपाल के नवाब हर साल होली के दूसरे दिन भाई दूज पर सीहोर में होली खेलने आते थे। नवाबों की यह परंपरा 2021 तक चलती रही। पूरे देश में होलिका दहन के बाद रंग पंचमी पर होली खेलने की परंपरा है, लेकिन नवाबी होली के कारण सीहोर में होली के बाद भाई दूज और रंग पंचमी, दोनों दिन होली खेली जाती थी।

ब्रज की होली की तरह महादेव की होली भी देखें
महादेव की होली खेलने के लिए पंडित प्रदीप मिश्रा ने देशभर के शिवभक्तों से आह्वान किया कि इस आयोजन के दर्शन के लिए अवश्य पधारें। उन्होंने कहा- लोग ब्रज की होली देखने जाते हैं, पर ब्रज की होली के साथ ही मेरी शिव की होली के भी दर्शन अवश्य करें। यह दिल में निवास करती है और शंकर सबको अपने रंग में रंगते हैं।

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