पंडित प्रदीप मिश्रा से गुरु पूर्णिमा पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा ली। गुरुवार सुबह से ही दीक्षा कार्यक्रम शुरू हो गया था, जो रात तक जारी रहा। सीहोर जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव का समापन गुरुवार को हो गया। अनुयायियों ने पंडित मिश्रा के चरणों की पूजा की और गुरु मंत्र ग्रहण किया।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने यहां आए भक्तों में से करीब तीन लाख लोगों को गुरु दीक्षा दी। इन सभी शिष्यों को श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का उच्चारण करते हुए गुरु दीक्षा दी गई। पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु का महत्व बताया और कहा कि शिष्यों को उनपर भरोसा रखना चाहिए, बिना गुरु के कोई ज्ञान नहीं मिलता। गुरु मंत्र, गुरु मंत्र याने जो गुरु हमें शिक्षा देते हैं उसी को गुरु मंत्र कहते हैं और गुरु मंत्र हमे मोक्ष के द्वार तक पहुंचाते हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि माता पिता प्रथम गुरु हैं इसलिए उनका सम्मान करें। जीवनभर उनकी सेवा करते रहें।
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जीवन में चार गुरु होते हैं, जो सदमार्ग की ले जाते हैं
जिला मुख्यालय स्थित कुबेरेश्वरधाम पर स्थित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के छठे दिवस अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भव्य पंडाल में अपने प्रवचन के दौरान कहा कि बचपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया, बुढ़ापा देख कर रोया, वही किस्सा पुराना है। हर जन्म में यही होता है। सारा जीवन बीत जाता है अंतिम समय में जब शक्ति समाप्त होती है शरीर में तब जीने का तरीका समझ में आता है तब व्यक्ति जीना चाहता है परंतु शक्ति ना होने के कारण सिर्फ पश्चाताप ही कर पाता है और यही सोचता है कि चलो अब तो जीवन बीत गया, अगले जन्म में करेंगे और ऐसे ही वह हर जन्म में डालता रहता है और कितने ही जन्म-जन्म बीत जाते हैं और व्यक्ति का मोक्ष नहीं हो पाता। इसलिए सावधान रहें अपने बड़े बुजुर्गों की बातों से लाभ उठाएं वेदों का अध्ययन करें और सलाह मानें आप का कल्याण हो जाएगा। वैसे से जीवन में चार गुरु रहते हैं। जिसमें माता, पिता, शिक्षक और सद्गुरु जो आपको सद्मार्ग की ओर ले जाता है।
भगवान शिव से बड़ा कोई गुरु नहीं, इसलिए उन्हें आदिगुरु कहा जाता है
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि हर साल यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पर भगवान शिव की कृपा से सत्य कार्य करने और अपने जीवन को सफल बनाए जाने के लिए दीक्षा लेने आते हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि आप सभी से मेरा निवेदन है कि आप जिस भगवान को मानते हैं उसको अपना गुरु बनाओ, क्योंकि भगवान शिव से बड़ा कोई गुरु नहीं है। इसलिए शंकर को आदि गुरु कहा जाता है। मां पार्वती ने भगवान शिव को अपना गुरु बनाया था। उन्होंने गुरु का महत्व बताते हुए कहा कि सद्गुरु या आध्यात्मिक गुरु, का मुख्य उद्देश्य अपने शिष्यों को सेवा और धर्म के मार्ग पर प्रेरित करना और उन्हें इस मार्ग पर चलने में मदद करना है। सद्गुरु, एक मार्गदर्शक के रूप में, शिष्यों को सही दिशा दिखाते हैं और उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति की ओर ले जाते हैं।
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अल सुबह से शुरू हो गई थी गुरु दीक्षा
गुरुवार अल सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी हुई थी, इसके बाद सुबह सात बजे से पंडित श्री मिश्रा ने यहां पर आए श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से देर शाम तक दीक्षा ग्रहण करने के साथ दर्शन, प्रवचन और भगवान की पूजा अर्चना की। अंतिम दिन भंडारे में करीब तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया। करीब 12 घंटे से अधिक समय तक चले भव्य आयोजन में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
संकट के समय गुरु नहीं गुरु मंत्र काम आता
पंडित मिश्रा ने कहा कि संकट के समय गुरु नहीं गुरु मंत्र काम आता है। शहर में गीता बाई पाराशर रही जो जगह-जगह भोजन बनाने का कार्य करती थीं। उन्होंने श्रीमद भागवत कथा का संकल्प लिया था पर पैसा नहीं था। उन्होंने कथा करवाई, उस समय न भागवत थी न ही धोती कुर्ता। उन्होंने कहा कि पहले आप गुरु दीक्षा लीजिए, गुरु दीक्षा लेने हम इंदौर गोवर्धन नाथ मंदिर गए। वहां से दीक्षा ली। मेरे गुरुजी ने ही मुझे धोती पहनना सिखाई, और उन्होंने छोटी सी पोथी मेरे हाथ में दे दी। वर्तमान में भी उनके मंत्र और उनके आशीर्वाद से मैं धर्म का कार्य कर रहा हूं।
पंडित मिश्र ने दी गुरु दीक्षा
गुरु पूर्णिमा के मौके पर पहुंचे लोग।
गुरु पूर्णिमा के मौके पर पहुंचे लोग।