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Rajgarh: कागजों में मृत घोषित बुजुर्ग, जनसुनवाई की शिकायत की रसीद नदारद; रजिस्टर्ड शिकायत से डरते हैं अधिकारी?

Wed, 26 Feb 2025 08:56 AM IST
राजगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़

राजगढ़ जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रति मंगलवार को प्रदेश के अन्य जिलों की तरह जनसुनवाई की जाती है। जहां जिले के अलग-अलग क्षेत्र से शहरी व ग्रामीण अपनी अपनी शिकायतें लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचते है। जहां उनके आवेदन पत्र को स्वीकार कर उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर्ड करके जनसुनवाई की पावती दी जाती है।

मंगलवार को राजगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले लासूडली धाकड़ गांव से एक बुजुर्ग शिकायतकर्ता भी अपने पोते के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। जहां जिला पंचायत सीईओ महीप किशोर तेजस्वी को उन्होंने अपना शिकायती आवेदन देते हुए बताया कि उन्हें ग्राम पंचायत के द्वारा कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। जिस कारण प्रदेश सरकार से मिलने वाली तमाम योजनाओं के लाभ से वे वंचित हो गए है। उन्हें इसकी जानकारी तब लगी, जब उन्होंने हाल ही में प्रदेश शासन के द्वारा अनिवार्य किए गए फॉर्मर आईडी के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया।

शिकायतकर्ता केसर सिंह नागर और उनके पोते देवकरण नागर ने बताया कि उनके दादा को वो कागजों में जिंदा कराने के लिए यहां लेकर आए है। क्योंकि ग्राम पंचायत के द्वारा उनके दादा को कागजों में मृत घोषित किया है। उनकी समग्र आईडी में भी स्वर्गीय केसर सिंह नागर आ रहा है। इस कारण ये शासन की सभी योजनाओं से वंचित हो गए है और इनकी फॉर्मर आईडी भी नहीं बन पा रही है। हमने जनसुनवाई में इसकी शिकायत की है,वहां से हमे बगैर कोई रसीद दिए सीधे आवेदन पर ही रिमार्क करके जनपद पंचायत में जाने के लिए कहा गया है।

वहीं उक्त पूरे मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ महीप किशोर तेजस्वी ने फोन पर बताया कि संबंधित शिकायतकर्ता का आवेदन जनसुनवाई में मैने ही लिया था, जिसे मैंने जनपद सीईओ को सीधे फॉरवर्ड किया है। जनसुनवाई की पावती के संबंध में सीईओ ने कहा कि मैंने खुद उक्त शिकायत को अपने संज्ञान में लिया है। मैं खुद उसकी मॉनिटरिंग करूंगा और कल ही जनपद सीईओ से उसकी अपडेट लूंगा, यदि रसीद नहीं भी मिली तो कोई बात नहीं...मामला मेरी प्रायोरिटी में है।

गौरतलब है कि जनसुनवाई में आने वाले शिकायतकर्ताओ से तय प्रोफार्मा वा आवेदन के माध्यम से शिकायत ली जाती है, ताकि उसकी समस्या के निराकरण के साथ साथ लापरवाही बरतने वाले के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सके। लेकिन उक्त प्रकरण में शिकायतकर्ता से लिखित आवेदन लेकर जनपद सीईओ को रिमार्क करके बगैर रजिस्टर्ड किए हुए सीधे शिकायतकर्ता को ही थमा दिया गया कि, आप सीधे वहीं चले जाए, लेकिन संबंधित को पावती उपलब्ध नहीं कराई गई जो एक तरह से शिकायतकर्ता का अधिकार होता है।

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