प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ और पक्ष में दायर की गई याचिकाओं पर हाईकोर्ट द्वारा 15 जुलाई से रोजाना सुनवाई की जाएगी। हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ की याचिका की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किए।
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बता दें, प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में पक्ष व विपक्ष में 86 याचिकाएं दायर की गई हैं। विक्षप में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ द्वारा इंदिरा साहनी के मामले में पारित आदेश के अनुसार आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती है। इसके अलावा जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की सीमा को नहीं बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में 51 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आबादी है। इसके अलावा 14 प्रतिशत सीट होल्ड किए जाने को भी चुनौती दी गई है।
पूर्व पीठ में अंतिम सुनवाई चल रही थी
पूर्व में याचिकाओं पर तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की पीठ द्वारा अंतिम सुनवाई की जा रही थी। तत्कालीन युगलपीठ ने पक्ष तथा विपक्ष में दायर की गई याचिकाओं को अलग-अलग करने के आदेश जारी किए थे। आरक्षण के खिलाफ दायर याचिकाओं को पहले पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया था। आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष प्रस्तुत किया था। युगलपीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हए ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत को यथावत रखते हुए उक्त आदेश जारी किए।