मध्यप्रदेश के हरदा जिले में यूरिया की किल्लत से किसान बेहाल हैं। इस साल किसानों ने सोयाबीन की जगह मक्का की खेती का रकबा तीन गुना तक बढ़ा लिया है, लेकिन अब समय पर यूरिया न मिलने से उनकी फसलों में नुकसानी होने का खतरा बढ़ गया है। इधर मंगलवार को जिला प्रशासन ने किसानों को एमपी एग्रो, डीएमओ गोदाम और सोसायटी के जरिये खाद वितरण किए जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद सैकड़ों किसान मंगलवार की शाम से ही गोदामों पर लाइन लगाने पहुंच गए। यहां पहुंचे किसान बैरिकेड के बीच मच्छरों से जूझते हुए रात भर जागकर सुबह के समय खाद वितरण की अपनी बारी आने का इंतजार करते दिखाई दिए।
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यहां खाद मिलने का इंतजार कर रहे किसानों का कहना था कि, इस समय उन्हें किसी भी तरह से अपनी फसल बचाने के लिए यूरिया खाद की तत्काल जरूरत है। इसलिए वे मजबूरी में पूरी रात यहां लाइन में लगकर अगले दिन अपनी बारी आने का इंतजार करने को मजबूर हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब तक फसल बोने के करीब एक महीने बाद तक भी उन्हें एक बोरी यूरिया भी नहीं मिल पाया है, जिससे उनकी मक्का की फसल पीली पड़ने लगी है। वहीं यहां पहुंचे ग्राम नाहल कलां के किसान पुरषोत्तम शरन और ग्राम खरदना के किसान चंद्रशेखर चौहान का यह भी कहना था कि वे इसके पहले भी बल्कि करीब 14 दिनों से यहां आकर कई बार लाइन में भी लगे, लेकिन उनकी बारी आने तक यहां हर बार खाद खत्म हो जाती है, जिससे लगता है खाद का बंदरबाट हो रहा है और जरूरतमंद किसानों को नहीं दिया जा रहा, जिसके चलते हमें हर बार खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है।