देहात थाना के सिंगपुर गांव में संचालित सभी पटाखा व्यापारियों की गोदाम को जिला प्रशासन ने सोमवार दोपहर खोल दिया। जिससे अब लोगों को दीपावली पर पटाखे मिल सकेंगे। दरअसल, इन सभी पटाखा गोदाम को प्रशासन ने सील कर दिया था और व्यापारियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। दीपावली के मौके पर शहर में पटाखा व्यापारियों को पटाखा बेचने की अनुमति नहीं थी, जिससे लोगों में रोष था। हिंदू संगठनों ने इसका विरोध किया और दो दिन पहले दमोह बंद का आह्वान किया था, जिसे स्थगित कर दिया गया था।
संगठन के सदस्यों ने कलेक्टर से मुलाकात कर लाइसेंस बहाल करने और गोदाम खोलने की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने शासन से मार्गदर्शन लेने के बाद सभी गोदाम में खोल दिया है। शहर के हटा नाका के पास अस्थाई पटाखा की दुकान लगाई जाएगी, जहां से शहर के लोग पटाखा खरीद सकेंगे।
बड़ापुल के पास हुआ था पटाखा फैक्टरी में विस्फोट
बीते साल 31 अक्तूबर 2023 को दमोह शहर के बड़ापुल के पास एक अवैध पटाखा फैक्टरी में ब्लॉस्ट में सात लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद जिला प्रशासन द्वारा फरवरी से सभी पटाखा व्यापारियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए थे। साथ ही सिंगपुर गांव में स्थित पटाखा गोदामों को भी सील कर दिया था। जिससे पूरे जिले में पटाखा बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगी थी। जिससे गणेशोत्सव व नवरात्र पर्व के दौरान भी आतिशबाजी नहीं हो पाई थी।
इधर प्रशासन द्वारा हाल ही में दीपावली पर्व पर केवल अस्थायी लाइसेंस तो जारी किए गए, लेकिन इन व्यापारियों को बाहर से पटाखा लाने का समय ही नहीं मिल पाया। यदि बाहर से पटाखा लाते भी हैं तो घर पर भी नहीं रख सकते। जिसके चलते पटाखा व्यापारी गोदामों खोलने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन द्वारा इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इधर जैसे ही हिंदू संगठनों को पता चला कि इस बार दीपावली पर्व पर बिना आतिशबाजी के मनाना होगा तो उन्होंने प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। अंततः प्रशासन को गोदामें खोलने की अनुमति देना पड़ी। विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अंजू खत्री ने बताया कि कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते लाइसेंस निलंबित किए गए थे।