दमोह जिले के टौरी गांव में संचालित शिक्षा विभाग के बालिका छात्रावास में सोमवार शाम मध्य प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग की टीम ने निरीक्षण किया। यहां चपरासी के कमरे से कई आपत्तिजनक किताबें टीम को मिली हैं, जो मुस्लिम ईसाई और बौद्ध धर्म से जुड़ी हैं। साथ ही राष्ट्रीय ध्वज डस्टबिन में मिला और भारत माता की तस्वीर उल्टी रखी थी। मामला इसलिए भी गंभीर है कि यहां की छात्राओं ने आरोप लगाया है कि वार्डन उन्हें पूजा पाठ नहीं करने देती।
साथ ही एक किराना दुकान छात्रावास में संचालित मिली। इन खामियों पर टीम के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि अधिकारियों को रिपोर्ट भेजेंगे ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। इस पूरे मामले में छात्रावास की वार्डन यशवंती महोबे की गलती सामने आ रही है।
ये भी पढ़ें- पुरानी बिल्डिंग से चल रहा पुलिस थाना, नया बना शोपीस, फरियादी धूप में हो रहे परेशान
आयोग की टीम में शामिल डॉ. निवेदिता शर्मा ने बताया कि छात्रावास की वार्डन से संबंधित शिकायत मिलने पर हम यहां पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान पता चला कि वार्डन यशवंती महोबे छात्रावास की प्यून के माध्यम से एक किराने की दुकान संचालित करती हैं और छात्राओं को सामान खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। जब हमने पास में ही संचालित उच्चतर माध्यमिक स्कूल का निरीक्षण किया तो वहां लैब के नाम पर स्टोर रूम था इसके अलावा एक कचरे के डिब्बे में राष्ट्रीय ध्वज मिला जो, बहुत ही आपत्तिजनक है। छात्राओं को खाने में प्रतिदिन मुनगा की पत्तियों की सब्जी खिलाई जा रही है जो भी अपने आप में गलत बात है।
ये भी पढ़ें- दमोह में मौसम बदला, बिजली गिरने से दो की मौत; कहीं पेड़ गिरे तो कहीं टीनशेड उड़े
आयोग के दूसरे सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि मौके पर वार्डन नहीं मिली और ना ही उनके अवकाश का आवेदन मिला। प्यून के भरोसे पूरा छात्रावास चल रहा है। ताले लगे हुए थे। एक ताले की चाबी प्यून के पास थी और दूसरी चाबी नहीं मिली, इसलिए हम भीतर नहीं जा सके। अब अधिकारियों से कहेंगे कि वह यहां पूरा निरीक्षण कर जांच करें। सहायक वार्डन मौके पर थीं जिन्होंने बताया कि चैनल बंद है। सिंह ने बताया कि जो छात्रावास के प्यून के कमरे से कुछ आपत्तिजनक किताबें मिली हैं जो मुस्लिम, बौद्ध और ईसाई धर्म से जुड़ी हैं। छात्राओं ने यह भी जानकारी दी है की वार्डन छात्राओं को धार्मिक पूजा पाठ नहीं करने देती हैं। यहां इस तरह की किताबें मिलना अपने आप में ही संदेह पैदा करता है। प्यून कम पड़ा लिखा है इसलिए यह भी संभावना है कि वार्डन ही यहां कुछ गलत काम कर रही है, जिसकी जांच होनी चाहिए।