लखनऊ स्थित ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भाषा विश्वविद्यालय उस शहर में स्थित है, जिसकी पहचान तहजीब और संस्कृति से होती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और जीवन मूल्यों के लिए विदेशों की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। भारत की धरती ने कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास जैसे महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिनसे प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को अपनाने पर जोर दिया। भाषा के आधार पर लड़वाने वालों से सतर्क रहें। भाषा के अज्ञान की वजह से समस्या आती है। कहा, शिक्षा और दीक्षा में अंतर होता है। शिक्षा तो आप कहीं से ले सकते हैं, विदेश से या फिर गूगल से भी। लेकिन दीक्षा केवल भारत में ही मिल सकती है। दीक्षा संस्कारों से आती है। बोले, भाषा के अज्ञान की वजह से समस्या आती है। भारत की भाषा का विस्तार पूरे विश्व में हुआ लेकिन हम अपने समृद्ध इतिहास से अपरिचित हैं। इंडोनेशिया की ऑफिशियल लैंग्वेज भाषा है। सिंधु से हिंदू, सप्ताह से हफ्ता हुआ। तारिक नाम संस्कृत के तारा से आया है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब बदल चुका है। पहले यूपी में कट्टे बनते थे, अब ब्रह्मोस बन रही है।