नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) में किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि बंद वातावरण में रखे गए कई वन्यजीव अपनी सामान्य औसत आयु से अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं। अध्ययन में विशेष रूप से चिम्पांजी, शेर, जिराफ और हिप्पो (दरियाई घोड़ा) जैसे वन्यजीवों का विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, सुरक्षित वातावरण और निरंतर देखभाल के कारण इन जानवरों की जीवन अवधि में वृद्धि देखी गई है। अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में वन्यजीवों को भोजन की उपलब्धता, शिकारियों का खतरा, बीमारियां और पर्यावरणीय चुनौतियों जैसी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं चिड़ियाघरों में उन्हें नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण, समय पर चिकित्सा सुविधा तथा पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है। चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि पशु कल्याण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नियमित मेडिकल चेकअप, टीकाकरण, पोषण निगरानी और व्यवहार संबंधी गतिविधियों के माध्यम से जानवरों को स्वस्थ रखने का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अध्ययन वन्यजीव संरक्षण, प्रबंधन और पशु कल्याण संबंधी नीतियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बंदी अवस्था में रहने वाले जानवरों को उनकी प्राकृतिक आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।