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Video: गोंडा का पसका मेला...श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाकर दान किया

पौष पूर्णिमा के अवसर पर पसका सूकरखेत में शनिवार को मुख्य स्नान पर्व पर श्रद्धालु उमड़ पड़े है। श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य कर रहे हैं। मेले में भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने प्रबंध किए हैं। जिला मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर स्थित सूकरखेत पसका भगवान वाराह की जन्मस्थली के साथ ही श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के रूप में भी विख्यात है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक, भगवान विष्णु ने वाराह के रूप में अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध कर धरती को मुक्त कराया था। यहां सरयू व घाघरा नदियों का संगम है। बाल्यावस्था में तुलसीदास ने यहीं अपने गुरु नरहरिदास से कथाएं सुनीं, जिसका उल्लेख रामचरितमानस में भी है, जैसे ''''कहत कथा इतिहास बहु आए सूकरखेत''''। यहां तुलसी धाम मंदिर और गुरु नरहरिदास का आश्रम है, जो इस जुड़ाव को प्रमाणित करता है। सरयू और घाघरा नदियों का संगम होने के कारण इसे संगम स्थल जितना पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, जो इसे एक विशिष्ट धार्मिक पहचान देता है। अगहन पूर्णिमा से पौष पूर्णिमा तक जनपद सहित अन्य प्रदेशों से साधु-संत, गृहस्थजन त्रिमुहानी घाट पर घास फूस, तिरपाल आदि की कुटिया आदि बनाकर भजन,कीर्तन में लीन रहते हैं। पौष पूर्णिमा के दिन हजारों श्रद्धालु पतित पावनी सरयू में आस्था की डुबकी लगाकर भंडारा दान आदि कर अक्षय पुण्य के भागी बन रहे हैं।

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