राजधानी में चुटकी भंडार ही नहीं कई सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों के भवन गंभीर रूप से जर्जर हालत में हैं। इन विद्यालयों में कब कोई बड़ी घटना हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। उचित रखरखाव और फंड की कमी के कारण इनमें से कई कॉलेजों के भवन अत्यधिक जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। इन कॉलेजों में यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी कोई बड़ी घटना का शिकार हो सकता है। शताब्दी पार चुके लालबाग स्थित लखनऊ इंटर कॉलेज में शताब्दी पार कर चुके दीवारों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं और खिड़की-दरवाजे तक गायब हो रहे हैं। पिछले करीब पांच सालों से व्यवस्था कंट्रोलर के हवाले थी अब प्रबंध समिति के हाथ में फिर व्यवस्था है। कॉलेज में सुधार के लिए कोई पहल नहीं की है। न ही अंलकार योजना के लिए आवेदन किया गया है। प्रधानाचार्य रजनी यादव का कहना है कि अलंकार योजना के लिए पात्रता पूरी नहीं है क्योंकि बच्चों की संख्या कम है। वहीं दिगंबर जैन इंटर कॉलेज का भवन जर्जर हो चुका है। बच्चों की संख्या 100 से भी कम है। मौजूदा समय में 12 शिक्षक हैं। सरकारी योजना अलंकार के लिए पात्रता भी पूरी नहीं है। वर्तमान में राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार सिंह कंट्रोलर हैं। उनका कहना है कि यहां प्रबंधन की लापरवाही से कॉलेज की दुर्गति हुई। वहीं बिशुन नारायण इंटर कॉलेज में में कहा जाता है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने कॉलेज में सहयोग किया था। रखरखाव की कमी के चलते इसके कई कमरे और छतें बेहद खराब हुई तो इसे जर्जर घोषित करवाकर गिरा दिया गया। कॉलेज को मूल भवन फिर से कब मिलेगा कुछ कह नहीं जा सकता। इस पर विभाग के पास भी जवाब नहीं है।