सिलिंडर के लिए लोग लंबी लाइनों में लगे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, मंजू गुप्ता ने सिलिंडर न मिलने पर खुद ही भट्ठी का निर्माण किया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक भी दिन दुकान बंद नहीं करनी पड़ी है। उनकी दुकान बंद न होने से लिंम सेंटर में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को खाने के लिए कहीं इधर-उधर दौड़ना नहीं पड़ा। रोज ही उन्हें यहां खाने के लिए आलू के पराठे समोसे आदि मिलते रहे।