प्रदेश में योगी सरकार का हिस्सा रही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होकर अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया है। बुधवार को पार्टी ने पहले चरण में 47 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी, जबकि गुरुवार को दूसरी सूची जारी करने की तैयारी है।
सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि पार्टी ने लंबे समय से भाजपा नेतृत्व से बिहार में एक दर्जन से अधिक सीटों की मांग की थी। पिछले दो वर्षों से सुभासपा बिहार में सक्रिय है और लगातार रैलियां, जनसभाएं आयोजित कर रही थी। राजभर का कहना है कि उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेताओं — राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े — से कई दौर की बातचीत की थी। सभी ने सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
राजभर ने कहा, “हमने गठबंधन बनाए रखने की पूरी कोशिश की, मगर हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अंततः हमें अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लेना पड़ा।” उन्होंने आगे कहा कि जब महाराष्ट्र से आने वाले केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की पार्टी बिहार में अकेले चुनाव लड़ सकती है, तो सुभासपा क्यों नहीं।
पार्टी प्रमुख ने बताया कि सुभासपा बिहार में कुल 153 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। उनका दावा है कि अधिकांश सीटों पर पार्टी के समर्थक मतदाताओं की मजबूत उपस्थिति है।
वहीं, सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर ने पटना में बताया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने उन्हें पांच सीटों की पेशकश की थी, लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन बनाए रखने की मंशा से उन्होंने इसे ठुकरा दिया। “हमने एनडीए को बरकरार रखने की पूरी कोशिश की, मगर भाजपा ने गठबंधन को बचाने में इच्छाशक्ति नहीं दिखाई,” उन्होंने कहा।
भाजपा द्वारा हाल ही में घोषित सीट बंटवारे में सुभासपा को एक भी सीट नहीं मिलने से पार्टी नेतृत्व नाराज़ था। इसी के बाद ओमप्रकाश राजभर ने गठबंधन से किनारा करते हुए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। अब सुभासपा का लक्ष्य बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना है।