अररिया में हाइवे छोड़ जब हम बैरगाछी से कुर्साकांटा की ओर बढ़े तो कुछ किलोमीटर जाने के बाद ही समझ में आ गया कि कुर्साकांटा-सिकटी को जोड़ने के लिए बकरा नदी पर बन रहा पुल क्यों ताश के महल की तरह गिर गया। कुर्साकांटा तक का सफर मुश्किल था और उससे आगे कच्चे रास्ते पर चारपहिया लेकर जाना लगभग असंभव जैसा। कभी चक्का कीचड़ में फंस रहा था तो कभी गाड़ी के फिसलकर किनारे बाढ़ के पानी में गिरने का डर। मतलब, सिर्फ निरीक्षण की जिम्मेदारी उठाने वाले सरकारी इंजीनियर इस काम के लिए जद्दोजहद शायद ही करते होंगे। 18 जून को यह पुल गिरा था और हम लगभग एक महीने बाद यहां गए थे। हमें सरकार की रिपोर्ट का भी इंतजार था। जांच करने वाले अभियंता ने नदी की वक्र चाल को इसका दोषी माना।