फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टैरिफ, H-1B वीजा और सऊदी-पाक रक्षा समझौते पर क्या बोले शशि थरूर?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Tue, 23 Sep 2025 01:54 PM IST

कांग्रेस सांसद और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने अमेरिका की नीतियों पर खुलकर अपनी राय रखी है। एएनआई से बातचीत के दौरान थरूर ने भारत पर टैरिफ, H-1B वीजा शुल्क वृद्धि, अमेरिका-पाकिस्तान रिश्ते और पाकिस्तान-सऊदी अरब रक्षा समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

थरूर ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को “न्यायहीन” बताया। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप मानते हैं कि टैरिफ उनकी समस्याओं का हल है। “ट्रंप चाहते हैं कि आयात महंगा हो, ताकि अमेरिकी कंपनियां अपने देश में उत्पादन करें और अमेरिकी मजदूरों को नौकरी मिले। इसके अलावा उन्हें लगता है कि इससे हर महीने अरबों डॉलर का राजस्व मिलेगा।”
हालांकि, थरूर ने इसे भारत के लिए गुस्सा बढ़ाने वाला फैसला करार दिया और कहा कि ट्रंप व उनके सलाहकारों के बयान बेहद आपत्तिजनक हैं।

थरूर ने उम्मीद जताई कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा से समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि अगर 25% टैरिफ को घटाकर 15-20% तक लाया जा सके तो व्यापार सामान्य हो सकता है। हालांकि, उन्होंने माना कि यह फिलहाल भारत के लिए झटका है लेकिन लंबे समय में भारत-अमेरिका संबंध संतुलित हो जाएंगे।

अमेरिका द्वारा H-1B वीजा शुल्क 1 लाख डॉलर तक बढ़ाने पर थरूर ने इसे “अव्यावहारिक और राजनीति से प्रेरित” बताया। उनके मुताबिक, ट्रंप मानते हैं कि इस वीजा के जरिए भारतीय कम वेतन पर नौकरी पाते हैं और इससे अमेरिकी नागरिकों को नुकसान होता है।
थरूर ने चेतावनी दी कि इस फैसले से अमेरिकी कंपनियाँ अब सीधे आउटसोर्सिंग करेंगी और नौकरियाँ भारत या अन्य देशों में चली जाएंगी।

थरूर ने कहा कि भारत को यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान अमेरिका का पुराना सहयोगी रहा है। उन्होंने कहा, “आईएसआई की स्थापना भी अमेरिकी मदद से हुई थी और कई पाकिस्तानी अफसरों ने अमेरिका में ट्रेनिंग ली।”
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी हमले केवल भारत ही नहीं बल्कि कभी-कभी पाकिस्तान सरकार और सेना पर भी होते हैं। इसलिए अमेरिका का पाकिस्तान से रिश्ता भारत से अलग है और भारत को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत-पाक संघर्ष में “मध्यस्थता” के दावे पर थरूर ने कहा, “हमने किसी से मध्यस्थता नहीं मांगी। अगर वॉशिंगटन ने इस्लामाबाद को हमला न करने को कहा, तो हम आभार जताते हैं, लेकिन भारत किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता।”

थरूर ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते पर कहा कि यह नई बात नहीं है, बल्कि पुरानी व्यवस्था का औपचारिक रूप है। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि यह चिंताजनक है क्योंकि समझौते में “एक देश पर हमला, दोनों पर हमला माना जाएगा।”
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत इस मुद्दे पर सऊदी अरब से बातचीत कर रहा होगा। साथ ही कहा कि हर नीति भारत को ध्यान में रखकर नहीं बनती न ट्रंप की और न ही सऊदी की।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें