भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) 25 अगस्त 2026 को अपने सफर के 10 साल पूरे कर रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की देखरेख में 25 अगस्त 2016 को UPI की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंकों के खातों को एक ऐसे साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना था, जिसके जरिए लोग मोबाइल फोन से तत्काल पैसे भेज और प्राप्त कर सकें। एक दशक में UPI ने भारत में भुगतान करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आज किराना दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े मॉल, ई-कॉमर्स कंपनियों और सरकारी सेवाओं तक QR कोड और UPI भुगतान आम हो चुका है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, UPI अब दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणालियों में अग्रणी है और भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
UPI की शुरुआत के समय इसका दायरा काफी छोटा था। अप्रैल 2016 में केवल 21 बैंक UPI से जुड़े थे, जबकि अगस्त 2016 में इसके पहले महीने में करीब 90,000 लेनदेन हुए। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI से जुड़े बैंकों की संख्या बढ़कर 44 हो गई। इसके बाद डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी और वित्त वर्ष 2025-26 तक UPI पर लाइव बैंकों की संख्या 703 पहुंच गई। जुलाई 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 741 बैंक हो चुका था। इसमें सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट्स बैंक और सहकारी बैंक भी शामिल हैं। इस व्यापक नेटवर्क ने UPI को महानगरों तक सीमित रहने के बजाय छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद की है।
UPI की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण इसके लेनदेन में हुई असाधारण वृद्धि है। शुरुआत में जहां कुछ हजार लेनदेन होते थे, वहीं अब हर महीने अरबों डिजिटल भुगतान UPI के माध्यम से किए जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए लगभग 1.79 करोड़ लेनदेन हुए थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर लगभग 24,166 करोड़ लेनदेन हो गई। लेनदेन के मूल्य में भी इसी तरह भारी वृद्धि हुई। यह बदलाव बताता है कि UPI अब केवल ऑनलाइन खरीदारी का माध्यम नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा के छोटे से छोटे भुगतान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। चाय, सब्जी, किराना और स्थानीय परिवहन जैसी छोटी सेवाओं के भुगतान से लेकर बड़े कारोबारी लेनदेन तक UPI का इस्तेमाल हो रहा है।
UPI की लोकप्रियता के पीछे इसकी सरलता, तेज गति और इंटरऑपरेबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं। उपयोगकर्ता को बैंक खाते की लंबी जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं होती और UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए भुगतान किया जा सकता है। अलग-अलग बैंक और भुगतान ऐप एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण उपभोक्ताओं को किसी एक बैंक या ऐप तक सीमित नहीं रहना पड़ता। इससे छोटे व्यापारियों के लिए भी डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान हुआ है। UPI ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए उन लोगों को भी औपचारिक डिजिटल वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद की है, जो पहले मुख्य रूप से नकद भुगतान पर निर्भर थे।
पिछले दस वर्षों में UPI ने भारत की सीमाओं से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है। भारत ने कई देशों के साथ UPI आधारित भुगतान व्यवस्था और सीमा-पार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सहयोग किया है। इससे भारतीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए विदेशों में डिजिटल भुगतान आसान होने के साथ-साथ भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की वैश्विक स्वीकार्यता भी बढ़ी है। इस पूरी यात्रा में NPCI, RBI, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं की संयुक्त भूमिका रही है। दस साल के भीतर 21 बैंकों से शुरू होकर 741 बैंकों तक पहुंचना और करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन जाना इस बात का प्रमाण है कि UPI ने भारत में भुगतान व्यवस्था को केवल डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि उसे अधिक तेज, सुविधाजनक और व्यापक बनाने में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।