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TMC Split: TMC के बागियों की पार्टी NCPI का कौन बना अध्यक्ष? TMC Rebels Merger | Mamata

Tue, 16 Jun 2026 07:10 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद चर्चा में आई नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई अब खुद अपने ही संगठनात्मक संकट से जूझती दिखाई दे रही है। पार्टी की संस्थापक शेउली कुंडू के इस्तीफे के बाद नए अध्यक्ष के नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ था। कयास लगाए जा रहे थे कि टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पार्टी की कमान संभाल सकती हैं। लेकिन अब काकोली ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए एक नए नाम का एलान किया है। हैरानी की बात यह है कि पार्टी के नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी के बारे में खुद एनसीपीआई के वरिष्ठ पदाधिकारी भी कुछ नहीं जानते। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एनसीपीआई की कमान किसके हाथों में गई है और पार्टी के भीतर आखिर चल क्या रहा है? देखिए यह रिपोर्ट।

तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के बाद चर्चा में आई नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया अब एक नए विवाद में घिर गई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच मंगलवार को एक नए नाम का एलान हुआ, लेकिन इस एलान ने सियासी सवालों को कम करने के बजाय और बढ़ा दिया है।

दरअसल, एक दिन पहले एनसीपीआई की संस्थापक और पार्टी प्रमुख शेउली कुंडू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी में शामिल हुए टीएमसी के बागी नेताओं में से कोई बड़ा चेहरा अब संगठन की कमान संभाल सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नाम को लेकर थी।

लेकिन मंगलवार को काकोली घोष दस्तीदार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी को पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष पद को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए और पार्टी ने सर्वसम्मति से नया नेतृत्व तय कर लिया है।

हालांकि, इस घोषणा के साथ ही एक नया विवाद खड़ा हो गया। वजह यह कि पार्टी के नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी के बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है। इतना ही नहीं, एनसीपीआई के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों का दावा है कि वे भी इस नाम से परिचित नहीं हैं।

खुद को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बताने वाले शांतनु डे ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी कौन हैं और पार्टी के भीतर क्या चल रहा है। उनके मुताबिक, उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए मेहनत की, लेकिन बड़े नेताओं के आने के बाद भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया।

शांतनु डे ने आरोप लगाया कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को पूरी तरह अंधेरे में रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नए नेतृत्व और फैसलों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई, जिससे वह बेहद निराश हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनसीपीआई में टीएमसी के बागी सांसदों के शामिल होने से पार्टी अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई, लेकिन संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व को लेकर अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। ऐसे समय में जब पार्टी खुद को तृणमूल कांग्रेस के विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, उसके अपने ही पदाधिकारियों का नए अध्यक्ष को न पहचानना संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उधर, टीएमसी से अलग हुए सांसदों का दावा है कि वे नई राजनीतिक दिशा देने के लिए एकजुट हुए हैं और पार्टी का संगठन जल्द ही मजबूत रूप में सामने आएगा। लेकिन फिलहाल एनसीपीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी नेतृत्व संरचना को स्पष्ट करना और पार्टी के भीतर पैदा हो रहे असंतोष को दूर करना है।

यानी, बंगाल की राजनीति में टीएमसी की टूट से पैदा हुई नई राजनीतिक ताकत खुद अपनी पहचान और नेतृत्व को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या एनसीपीआई इस संगठनात्मक संकट से निकलकर खुद को एक गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर पाएगी या नहीं।

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