पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए उसके तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। पूर्व सांसद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और सुखेंदु शेखर रॉय ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
भाजपा में शामिल होने के बाद तीनों नेताओं का स्वागत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले 34 वर्षों तक वाम मोर्चे का शासन रहा और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन लंबे समय तक चली इस राजनीति ने राज्य के विकास को प्रभावित किया। उनका आरोप था कि राज्य सरकार ने केंद्र के साथ सहयोग करने के बजाय लगातार टकराव का रास्ता अपनाया, जिससे विकास कार्यों की गति प्रभावित हुई।
समिक भट्टाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों पर विश्वास जताते हुए इन तीनों नेताओं ने पार्टी का दामन थामा है। उन्होंने कहा कि सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और सुखेंदु शेखर रॉय राज्यसभा में प्रभावी भूमिका निभा चुके हैं और उनके भाजपा में शामिल होने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने पार्टी की ओर से तीनों नेताओं का स्वागत करते हुए इसे भाजपा के लिए उत्साह बढ़ाने वाला कदम बताया।
भाजपा में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश और 'डबल इंजन' सरकार वाले राज्यों में हुए विकास कार्यों को नकारा नहीं जा सकता।
सुष्मिता देव ने कहा कि वह स्वयं असम में रहती हैं और वहां हुए बदलाव की प्रत्यक्ष गवाह हैं। उनके अनुसार, भाजपा लगातार तीसरी बार असम में सरकार बनाने में सफल रही है, जो जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है और इस मामले में पिछली सरकारों की तुलना में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।
इस दौरान सुष्मिता देव ने तृणमूल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर ही कई नेता संगठन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने पार्टी में 'शुद्धिकरण' की बात कही थी। सुष्मिता देव ने कहा कि यदि कोई नेता शुद्धिकरण की जरूरत बता रहा है, तो इसका अर्थ है कि वह स्वयं संगठन में कमियों को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कुणाल घोष के बयान का भी जिक्र करते हुए टीएमसी नेतृत्व पर सवाल उठाए।
बंगाल की राजनीति में इन तीन नेताओं का भाजपा में शामिल होना ऐसे समय हुआ है, जब राज्य में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। इसे भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती और तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस घटनाक्रम का पश्चिम बंगाल की आगामी राजनीतिक रणनीति और चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है।