प्रदेश कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच अब पार्टी हाईकमान ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि प्रदेश नेतृत्व और चुनावी कमेटियों को लेकर जो फैसला लिया जा चुका है, उसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। बघेल के इस सख्त रुख के बाद बागी नेताओं पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है और पार्टी के भीतर नई राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, नाराज नेताओं को यह संकेत भी दे दिया गया है कि यदि वे हाईकमान के फैसले का विरोध जारी रखते हैं तो उन्हें संगठन में हाशिये पर किया जा सकता है। इतना ही नहीं, आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के दौरान भी ऐसे नेताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि यह संदेश सीधे उन नेताओं के लिए है, जो लगातार प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व पहले ही अनुशासन को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। फरवरी में पंजाब दौरे के दौरान राहुल गांधी ने बरनाला में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में सभी वरिष्ठ नेताओं से साफ कहा था कि पार्टी में एकजुट होकर काम करना होगा, अन्यथा संगठन सख्त फैसला लेने से पीछे नहीं हटेगा।
इसी बीच, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक कई नेता बुधवार को पंजाब कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे और प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात की। इनमें कई पूर्व विधायक भी शामिल रहे। वहीं, बघेल ने भी कुछ वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष से उनके आवास पर जाकर बातचीत की और संगठनात्मक स्थिति पर चर्चा की।
हालांकि, पार्टी के कई बड़े नेताओं ने अब भी दूरी बनाए रखी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, सुखपाल सिंह खैरा, भरत भूषण आशु और कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष संगत सिंह गिलजियां समेत कई वरिष्ठ नेता अभी तक बघेल की बैठकों में शामिल नहीं हुए हैं। बताया जा रहा है कि बघेल अगले दो दिन तक चंडीगढ़ में रहकर सभी पक्षों से बातचीत करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, चन्नी गुट ने हाईकमान को प्रदेश नेतृत्व में बदलाव और चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेशाध्यक्ष या मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग पर विचार के लिए सात दिन का समय दिया था। अब यह समयसीमा पूरी होने वाली है। ऐसे में चन्नी समर्थक नेता जल्द ही मोरिंडा स्थित उनके आवास पर बैठक कर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।
उधर, पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की भी करीबी नजर बनी हुई है। उनकी टीम चंडीगढ़ में मौजूद रहकर लगातार रिपोर्ट भेज रही है। राहुल गांधी विदेश दौरे पर हैं, जबकि भूपेश बघेल अपने दौरे के बाद विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे। फिलहाल चन्नी गुट को केंद्रीय नेतृत्व से मिलने का समय नहीं मिला है।
इस बीच, अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात कर उन्हें हाईकमान का संदेश समझाने की कोशिश की। औजला ने कहा कि कांग्रेस एक बड़ा संगठन है, जहां मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा हाईकमान का होता है और सभी नेताओं को उसका सम्मान करना चाहिए।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर तंज कसा है। पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने कहा कि यदि कांग्रेस नेतृत्व चन्नी की बात नहीं सुनता, तो उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह अलग राजनीतिक राह चुनने पर भी विचार करना चाहिए। ऐसे में पंजाब कांग्रेस का यह सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।