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Tarique Rahman India Visit: तारिक रहमान के दौरे पर अब क्या बोला बांग्लादेश? Sheikh Hasina

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Sun, 23 Aug 2026 09:20 PM IST

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। ढाका ने साफ कर दिया है कि भारत के साथ रिश्ते सुधारने की इच्छा जरूर है, लेकिन राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री की भारत यात्रा को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। दोनों देशों के बीच पर्याप्त बातचीत, ठोस प्रगति और जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद ही दौरे की तारीख तय होगी।

तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पिछले दो साल में काफी उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद वह भारत आ गई थीं। इसके बाद ढाका और नई दिल्ली के रिश्तों में तनाव बढ़ता गया। अब रहमान की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच जमी बर्फ पिघलाने और रिश्तों को फिर पटरी पर लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय यात्रा के अलावा 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भी शामिल होने का न्योता दिया है। ऐसे में अगर यह दौरा होता है तो यह दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद बहाली का बड़ा मौका बन सकता है।

लेकिन इस पूरी कवायद के बीच सबसे बड़ा पेंच शेख हसीना के प्रत्यर्पण का है। हसीना के भारत में होने को लेकर ढाका लगातार अपनी चिंता और मांग सामने रखता रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि मौजूद है और हसीना का प्रत्यर्पण द्विपक्षीय बातचीत का अहम हिस्सा है। वहीं भारत ने कहा है कि बांग्लादेश के अनुरोध की संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है।

हाल ही में शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई वर्चुअल मीडिया बातचीत ने भी दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ाया। हसीना ने बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई और कहा कि वह लोकतंत्र बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके खिलाफ बांग्लादेश में मानवता के खिलाफ कथित अपराधों से जुड़ा मामला चल चुका है और नवंबर 2025 में एक विशेष न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में उन्हें मौत की सजा सुनाई थी।

हसीना की मीडिया बातचीत पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे बांग्लादेश की जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद प्रत्यर्पण की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी। भारत ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग बताते हुए कहा कि नई दिल्ली की इसमें कोई भूमिका नहीं थी और उसने हसीना की टिप्पणियों का समर्थन नहीं किया।

अब तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर बांग्लादेश का रुख बेहद स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका भारत के साथ सकारात्मक और कामकाजी संबंध चाहता है, क्योंकि दोनों देश पड़ोसी हैं। लेकिन बातचीत में बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा। यानी ढाका रिश्ते सुधारने के लिए तैयार है, लेकिन हसीना के प्रत्यर्पण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।

दूसरी ओर, भारत की तरफ से भी संकेत है कि किसी भी रिश्ते की सफलता के लिए पारस्परिक हित जरूरी है। ऐसे में तारिक रहमान की संभावित नई दिल्ली यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं होगी, बल्कि यह तय करने का मौका भी होगी कि भारत और बांग्लादेश तनाव के दौर से निकलकर किस हद तक व्यावहारिक और स्थिर रिश्तों की ओर बढ़ सकते हैं।

अब असली सवाल यही है क्या तारिक रहमान का भारत दौरा दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई शुरुआत करेगा? या शेख हसीना का प्रत्यर्पण एक बार फिर बातचीत के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा रहेगा?

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