मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने के बाद चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। इसी बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को रोकने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। पार्टी नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि सभी कांग्रेस विधायक मतदान से पहले कर्नाटक में एक साथ रहेंगे और मतदान से ठीक एक दिन पहले भोपाल लौटेंगे। इस कदम को राजनीतिक गलियारों में "विधायक संरक्षण रणनीति" के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य पार्टी के सभी विधायकों को एकजुट बनाए रखना और किसी भी प्रकार की टूट-फूट की संभावना को समाप्त करना है।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान कुछ विधायकों पर दबाव या प्रलोभन डाला जा सकता है। इसी कारण पार्टी ने सभी विधायकों को भोपाल से बाहर एक सुरक्षित स्थान पर रखने का फैसला किया है। मंगलवार को सभी विधायकों को भोपाल से कर्नाटक ले जाने की तैयारी की गई, जहां वे पार्टी नेतृत्व की निगरानी में रहेंगे। राज्यसभा चुनावों में अक्सर संख्या बल के अलावा राजनीतिक प्रबंधन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए कांग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
मतदान से पहले नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar के आवास पर आयोजित रात्रिभोज बैठक में कांग्रेस नेताओं ने चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद Jitu Patwari ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है और इसलिए वह राजनीतिक प्रबंधन के जरिए चुनावी परिणाम प्रभावित करने का प्रयास कर सकती है। पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस एकजुट है और चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे।
जीतू पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि देशभर में जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त की घटनाएं बढ़ रही हैं और सत्ता हासिल करने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने विधायकों को निर्देश दिया है कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें किसी प्रकार का प्रलोभन देता है या संपर्क करता है, तो उसकी बातचीत का रिकॉर्ड रखा जाए। उनके अनुसार पार्टी ने इस संबंध में सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नेतृत्व तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को निराधार बताती रही है और दावा कर रही है कि उसके उम्मीदवारों को पर्याप्त समर्थन मिलेगा। अब सभी की निगाहें राज्यसभा चुनाव के मतदान और परिणामों पर टिकी हैं। यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक प्रबंधन की परीक्षा भी बन गया है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि किस दल की रणनीति अधिक प्रभावी साबित हुई और किसे राजनीतिक बढ़त मिलती है।