प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत की विदेश नीति पर यहां बहुत कुछ कहा गया। वैश्विक समर्थन पर भी चर्चा हुई...हमें वैश्विक समर्थन मिला। लेकिन दुर्भाग्य से, मेरे देश के वीर जवानों के पराक्रम को कांग्रेस का समर्थन नहीं मिला।"22 अप्रैल के आतंकवादी हमले के मात्र 3-4 दिन बाद ही ये (कांग्रेस) उछल रहे थे और कहना शुरू किया कि कहां गई 56 इंच की छाती? कहाँ खो गया मोदी?, मोदी फेल हो गया ये मजा ले रहे थे पहलगाम के निर्दोष लोगों की हत्या में भी वो अपनी राजनीति तरास रहे थे।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष पर विराम लगाने यानी 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने से पहले की रात को क्या-क्या हुआ? यह बताया। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे पाकिस्तान घुटनों पर आया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना साफ किया कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत को ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा। इसके अलावा पीएम मोदी ने सिंधू जल संधि का भी जिक्र किया और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और कांग्रेस पार्टी की जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा, '9 तरीख की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात करने का प्रयास किया, वो घंटे भर कोशिश कर रहे थे, लेकिन मेरी सेना के साथ बैठक चल रही थी, तो मैं उठा नहीं पाया, लेकिन बाद में मैंने कॉल बैक किया। फिर अमेरिका के उपराष्ट्रपति जी ने मुझे बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। इस पर मैंने कहा- अगर पाकिस्तान का ये इरादा है, तो उसे बहुत महंगा पड़ेगा। अगर पाकिस्तान हमला करेगा तो हम बड़ा हमला कर जवाब देंगे। आगे मैंने कहा था कि हम गोली का जवाब गोले से देंगे।'
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15 दिन बाद भारतीय सेना ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया था। जिसमें कई कुख्यात आतंकी भी मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच हालात बिगड़े और दो दशक बाद चरम पर पहुंच गए। वहीं पाकिस्तान की तरफ से भारत के शहरों को निशाना बनाए जाने के बाद, भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने सभी को नाकाम करते हुए उसका माकूल जवाब दिया। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के 14 सैन्य ठिकानों को ध्वस्त कर दिए। इससे घबराए पाकिस्तान ने 10 मई को भारत के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा, जिसे दोनों देशों ने आपसी चर्चा के बाद लागू कर लिया।