इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई दर्दनाक घटना के बाद मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। 15 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाते हुए इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव कर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना बेहद गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी तय की जा रही है। उन्होंने लिखा कि इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
गौरतलब है कि रोहित सिसोनिया को हाल ही में इंदौर से भोपाल ट्रांसफर कर मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया था, लेकिन अब इस घटना के बाद उन्हें हटाकर किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में उप सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले को प्रशासनिक स्तर पर कड़ा संदेश माना जा रहा है।
इस घटना से पहले ही राज्य सरकार इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव कर चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत नगर निगम में एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार ने तीन IAS अधिकारियों को अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया है।
इनमें 2019 बैच के IAS और खरगोन जिले में सीईओ रहे आकाश सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है। वहीं, 2020 बैच के IAS और आलीराजपुर में सीईओ रहे प्रखर सिंह तथा 2020 बैच के ही IAS और इंदौर में उप परिवहन आयुक्त रहे आशीष कुमार पाठक को भी अपर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही 2017 बैच के IAS रोहित सिसोनिया को नगर निगम से हटाकर शासन स्तर पर नई जिम्मेदारी दी गई है।
भागीरथपुरा में हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों की गहन समीक्षा की थी। इस समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि जल आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां थीं। इसके बाद शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि नगर निगम की पूरी प्रशासनिक टीम में बदलाव कर जवाबदेही तय की जाए।
नगर निगम में एक साथ तीन IAS अधिकारियों की नियुक्ति को सरकार की ओर से प्रशासनिक सख्ती और निगरानी तंत्र मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई टीम के जरिए निगम के कामकाज, जल आपूर्ति व्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी हाल में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए नगर निगम और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस एक्शन से यह भी संकेत मिला है कि अब शहरी प्रशासन में लापरवाही पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की जाएगी।