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Meenakshi Natarajan Nomination Cancelled:नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर भाजपा ने किया बड़ा खुलासा!

Wed, 10 Jun 2026 02:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

मध्य प्रदेश मंत्री विश्वास सारंग ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कहा, "मेरा तो ये मानना है कि चुनाव होता तो भी मीनाक्षी नटराजन बुरी तरह हारती। भाजपा तीसरी सीट भी जीतने वाली थी.कांग्रेस के नेताओं ने खुलेआम ये बात कही थी कि टिकट बहुत गलत दिया गया है। अलग-अलग गुट मीनाक्षी नटराजन का विरोध कर रहे थे। मेरा ये मानना है कि कांग्रेस को मालूम था कि मीनाक्षी नटराजन बुरी तरह हारने वाली हैं, उनके विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे इसलिए जानबूझकर कांग्रेस द्वारा ये फॉर्म रिजेक्ट करवाया गया.कांग्रेस ने ऐसा 'फेस सेविंग' के लिए किया.क्या राष्ट्रीय पार्टी के लोग गलत फॉर्म भरेंगे? क्या उन्हें आचार संहिता की जानकारी नहीं है?

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा खारिज कर दिया गया। नामांकन रद्द होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि यदि चुनाव होता तब भी मीनाक्षी नटराजन बुरी तरह हार जातीं और भाजपा तीसरी राज्यसभा सीट भी जीतने वाली थी। सारंग के अनुसार कांग्रेस के भीतर ही उम्मीदवार चयन को लेकर भारी असंतोष था और कई नेताओं ने खुलकर कहा था कि मीनाक्षी नटराजन को टिकट देना गलत फैसला है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के अलग-अलग गुट उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे थे और पार्टी को यह अंदेशा था कि उसके विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। इसी कारण, सारंग के मुताबिक, कांग्रेस ने जानबूझकर ऐसी स्थिति बनने दी जिससे नामांकन खारिज हो जाए और संभावित हार से बचा जा सके। उन्होंने इसे कांग्रेस की “फेस सेविंग” रणनीति बताया।

विश्वास सारंग ने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं से नामांकन प्रक्रिया में इतनी बड़ी गलती कैसे हो सकती है। उनका तर्क था कि क्या पार्टी को चुनावी नियमों और आचार संहिता की जानकारी नहीं है, जबकि कांग्रेस लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ती रही है। भाजपा का आरोप है कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके आधार पर आपत्ति दर्ज हुई और बाद में नामांकन रद्द कर दिया गया। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की ओर से यह आपत्ति उठाई गई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में एक मामले से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं किया। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया।

दूसरी ओर कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है और भाजपा राजनीतिक लाभ लेने के लिए तकनीकी आधारों का सहारा ले रही है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष विरोध दर्ज कराया और दावा किया कि जिस मामले को आधार बनाकर नामांकन रद्द किया गया, वह नामांकन निरस्त करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं था। पार्टी ने इसे भाजपा की राजनीतिक साजिश बताते हुए फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां भाजपा इसे कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी और आंतरिक कलह का परिणाम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ कार्रवाई करार दे रही है। राज्यसभा चुनाव से पहले यह मामला प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है।

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