जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर तमाम तरह के कयास जारी रहने के बीच निर्वाचन आयोग (ईसी) ने देश के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। आयोग ने राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को इसके लिए निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही दो सहायक निर्वाचन अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। निर्वाचन आयोग ने यह नियुक्तियां राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव नियम 1974 के तहत की है और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी अगले कुछ दिन में कर दी जाएगी।आयोग के मुताबिक, ये चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी बारी-बारी से लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव को सौंपी जाती है। पिछले चुनाव में लोकसभा महासचिव ने यह भूमिका निभाई थी। इसलिए इस बार पूरी प्रक्रिया राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी के नेतृत्व में संपन्न होगी।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा जल्द ही उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना दावेदार तय करने पर मंथन शुरू करेगी। हालांकि, सहयोगी दलों की राय है कि पार्टी इस बार किसी प्रयोगधर्मिता के बजाय संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक शुचिता पर ध्यान देगी। यानी धनखड़ की तरह दूसरे दलों से आए नेता की बजाय पार्टी के किसी अनुभवी नेता को चुनने पर ध्यान देगी। इस बीच, एक चर्चा यह भी है कि जदयू सांसद हरिवंश के नाम पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर अपने करीब सात साल के कार्यकाल में सत्ताधारी दल का भरोसा हासिल किया है। वहीं कौन बनेगा अगला उपराष्टर्पति इस पर अटकलें खूब लग रहीं हैष उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा, बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद का भी नाम सामने आ रहा है। बिहार चुनाव के मद्देनजर माना जा रहा है कि बीजेपी की तरफ से जदयू को यह ऑफर दिया जा सकता है।
हालांकि, राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस पर अपनी ही पार्टी के किसी वरिष्ठ और अनुभवी नेता पर दांव खेल सकती है। ऐसे में उपराष्ट्रपति की रेस में निम्नलिखित नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
थावर चंद गहलोत बीजेपी के वरिष्ठ नेता और दलित समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। वे मध्य प्रदेश से कई बार राज्यसभा सांसद रहे हैं। इसके साथ ही वह राज्यसभा में सदन के नेता भी रह चुके हैं। इसके साथ ही बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं। गहलोत नरेंद्र मोदी सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का जिम्मा संभाल चुके हैं। गहलोत को विवादों से दूर रहने वाला नेता माना जाता है। संगठन में मजबूत पकड़ होने, प्रशासनिक अनुभव के साथ ही जाति समीकरण में फिट होना उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित दावेदार बनाती है।