प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार मंचों से स्वदेशी अपनाने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि दुकानदार गर्व से यह बोर्ड लगाएं कि वे स्वदेशी वस्तुएं बेचते हैं। यह अपील उस समय और अहम हो गई है जब अमेरिका ने टैरिफ वॉर और एच-1बी वीजा को हथियार बनाया और चीन ने रेयर अर्थ मेटल्स पर दबाव बनाकर भारत जैसे देशों के सामने संकट खड़ा किया। सवाल यह है कि आज के वैश्वीकरण के दौर में क्या पूरी तरह स्वदेशी होना संभव है?
भारत में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसे सेक्टर में प्रगति हुई है, लेकिन ज्यादातर असेंबलिंग तक ही सीमित है। कल-पुर्जे चीन से आयात होते हैं। यही हाल हेल्थ सेक्टर और सौर ऊर्जा पैनलों का है। अगर चीन निर्यात रोक दे, तो भारत का उत्पादन ठप हो सकता है।
सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत ने कदम बढ़ाया है। सरकार के निवेश के चलते इस साल के अंत तक देश में पूर्ण रूप से स्वदेशी सेमीकंडक्टर बनने लगेंगे। यह आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि होगी।
एमएसएमई विशेषज्ञ शरद कोहली का कहना है कि “आज के दौर में पूर्ण स्वदेशी संभव नहीं, लेकिन इतना सक्षम होना जरूरी है कि कोई देश हमें ब्लैकमेल न कर सके।”
स्वदेशी अपनाने के इस मुहीम को लेकर अमर उजाला के संवाददाता से बातचीत में आर्थिक विशेषज्ञ और BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने क्या कहा चलिए आपको सुनती है
वहीं साउथ एशियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सर्वेश पाठक ने कहा कि “140 करोड़ आबादी वाले देश में करोड़ों युवाओं को रोजगार दिलाने का सबसे बेहतर रास्ता स्वदेशी उत्पादन है।”
पीएम मोदी की अपील का असली अर्थ यही है कि भारत को हर सेक्टर में न्यूनतम आत्मनिर्भर बनना होगा। ताकि वैश्विक राजनीति या व्यापारिक दबाव हमें कभी कमजोर न कर सके और करोड़ों युवाओं को रोजगार का रास्ता मिले।