Swami Shankaracharya Row News: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच हुए टकराव के बाद यह मामला गरमाता नजर जा रहा है। स्नान को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अब साधु-संतों, राजनेताओं और सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच गया है। इतना ही नहीं, टकराव के बाद यह विवाद शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गया। अब इस बहस में कथावाचक और धर्माचार्य भी कूद पड़े हैं। इस बीच, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी हैं।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए व्यवहार पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अपने सामने धर्म संकट बताते हुए उन्होंने कहा कि दोनों अपने ही हैं। एक तरफ भगवान रूपी शंकराचार्य हैं। उन पर किसी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। मेरे गुरु ने बड़ों का आदर करना सिखाया है। वहीं दूसरी ओर वो हैं, जो बड़ी संख्या में आए लोगों की चिंता कर रहे हैं। इतना जरूर कहना चाहूंगा, इसे बढ़ाना नहीं चाहिए। आपसी मतभेद भुलाकर सुलझा देना चाहिए। प्रशासन से कहा कि जिसके माथे पर तिलक, सिर पर शिखा और शरीर पर भगवा हो, उनकी बात सुननी चाहिए। मारपीट करना ठीक नहीं है।