यह सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं था… यह उन घरों में हमेशा के लिए पसरा सन्नाटा था, जहां तिरंगे में लिपटे बेटे, पति, भाई और पिता लौटे। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भद्रवाह-चंबा मार्ग पर गुरुवार को हुआ यह हादसा पूरे देश के लिए गहरे शोक का कारण बन गया। 200 फीट गहरी खाई में सैन्य वाहन के गिरने से चार राष्ट्रीय राइफल्स के जवान समेत कुल दस वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी।
इस हादसे में बुलंदशहर के लाल मोनू पुत्र प्रताप सिंह भी शहीद हो गए। मोनू मूल रूप से खुर्जा तहसील के गांव बगराई के रहने वाले थे। वर्तमान में उनका परिवार अलीगढ़ जिले की तहसील गभाना के गांव दाऊपुर में रहता है। जैसे ही बगराई गांव में मोनू के बलिदान की खबर पहुंची, पूरा गांव शोक में डूब गया। जिन गलियों में कभी मोनू की हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियों की आवाज है।
मोनू के परिजन तुरंत दाऊपुर गांव पहुंच गए हैं, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में हर आंख नम है। कोई मां अपने बेटे को देखकर फूट-फूट कर रो रही है, तो कोई पिता अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दिल का दर्द आंसुओं से भी ज्यादा भारी है। मोनू सिर्फ अपने परिवार का नहीं, पूरे गांव का गर्व थे।
जम्मू में टेक्निकल एयरपोर्ट पर शुक्रवार को सभी दस बलिदानी जवानों को श्रद्धांजलि दी गई। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर, फूलों से सजी कतारें और गूंजती सलामी की आवाज… यह दृश्य हर किसी की आंखों को नम कर देने वाला था। व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल पी. के. मिश्रा ने समारोह की अध्यक्षता की। सेना, भारतीय वायु सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की ओर से भी पुष्पांजलि अर्पित की गई। जम्मू जोन के आईजीपी भीम सेन टुटी और सीआरपीएफ के आईजी आर. गोपाल कृष्ण राव ने भी तिरंगे में लिपटे जवानों को श्रद्धांजलि दी। हर पुष्पांजलि के साथ देश की कृतज्ञता भी उन शहीदों के चरणों में अर्पित की जा रही थी, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
इस हादसे में बलिदान हुए जवानों में मोनू (बुलंदशहर-हिंदम), जोबंजीत सिंह (रूपनगर-अंबाला), मोहित (झज्जर-हिंदम), शैलेन्द्र सिंह भदौरिया (मोहर-ग्वालियर), समिरन सिंह (झारग्राम-कलैकॉन्डा), प्रदुम्न लोहार (पुरुलिया-रांची), सुधीर नारवाल (यमुनागर-अंबाला), हरे राम कुमार (भोजपुर-बिहटा), अजय लकरा (रांची) और रिनखिल बलीयन (हापुर-हिंदम) शामिल हैं। उनके पार्थिव शरीरों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके-अपने गृह नगरों के लिए रवाना किया गया।
व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। अधिकारियों के अनुसार खराब मौसम और खतरनाक पहाड़ी मार्ग पर चलते समय वाहन सड़क से फिसल गया। लेकिन इन शब्दों के पीछे छिपा दर्द उन परिवारों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता, जिन्होंने एक पल में अपना सब कुछ खो दिया।
आज देश उन वीरों को नमन कर रहा है, जिनकी वजह से हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। मोनू जैसे सपूतों की शहादत सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि यह उस कीमत की याद दिलाती है, जो हमारे जवान हर दिन चुकाने के लिए तैयार रहते हैं।