"एंड-ऑफ-लाइफ" वाहनों की पहचान करने के लिए पेट्रोल पंपों को ANPR यानि ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरों से लैस कर दिया गया है। ये एंड-ऑफ-लाइफ डीजल और पेट्रोल गाड़ियों की पहचान करेंगे। फिर पेट्रोल पंप पर तैनात पुलिस या ट्रांसपोर्ट विभाग की टीमें इन गाड़ियों का चालान करेंगी या इन्हें सीधा जब्त कर लिया जाएगा। लेकिन इन सब के बीच सवाल ये उठ रहा है कि दिल्ली में पुरानी गाड़ियों का क्या होगा और क्या लोग इन गाड़ियों को दूसरे राज्यों बेच सकेंगे जहां यह नियम लागू नहीं है?
अगर ऐसा हुआ तो इन पर चालान किया जाएगा. इसका असर दिल्ली के तरकीबन 60 लाख वाहनों पर पड़ेगा.कई लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि क्या अब दिल्ली की 15 साल पुरानी पेट्रोल कार पूरी तरह बेकार हो जाएंगी. तो आपको बता दें ऐसा नहीं है आप इन कारों को देश के दूसरे राज्यों में चला सकेंगे. लेकिन इसके लिए कुछ नियम है चलिए आपको बताते हैं.आपको बता दें दिल्ली में जो 15 साल पुरानी पेट्रोल कार आप नहीं चला सकते. उसे आप उत्तर प्रदेश, राजस्थान बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में चला सकते हैं. हालांकि इन राज्यों के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग नियम है.जब आप दिल्ली की 15 साल पुरानी पेट्रोल कार को किसी दूसरे राज्य में ले जाएंगे. तो पहले आपको उस राज्य में उस कार का रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. लेकिन उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार और बाकी राज्यों के कुछ जिले ऐसे हैं. जहां पर 15 साल से पुरानी कार का दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता.
मगर जिन जिलों में आप 5 साल पुरानी पेट्रोल कार का रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. उसके लिए भी आपको एक प्रक्रिया से गुजरना होगा. आपको पहले दिल्ली सरकार से एनओसी प्राप्त करनी होगी. उसके बाद दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.इतना ही नहीं एनओसी आपको कार की Eol अविधि खत्म होने से पहले हासिल करनी होगी. तभी आप दूसरे राज्य में उसका रजिस्ट्रेशन करवा पाएंगे. अगर आप इन नियमों का ध्यान में रखते हैं. तो आप आराम से 15 साल पुरानी पेट्रोल कार इन राज्य में चला सकेंगे.आप दिल्ली के बाहर अपनी पुरानी गाड़ी उन राज्यों में बेच सकते हैं जहां यह नियम लागू नहीं है। बता दें कि यह नियम नोएडा, गाजियाबाद, फरिदाबाद, गुरुग्राम, आगरा, मथुरा जैसे शहरों में लागू नहीं है। यही वजह है कि बड़ी तादाद में लोग ट्रांसपोर्ट विभाग से एनओसी लेकर दिल्ली में डी-रजिस्टर्ड की जा चुकी अपनी गाड़ियों को दूसरे राज्यों के लोगों को बेच रहे हैं और इन्हें खरीदने वाले लोग अन्य राज्यों में इन गाड़ियों को रजिस्टर्ड करवा कर उनका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं।